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Baghpat News: तिलवाड़ा के पुरावशेष से पुख्ता हुए बागपत में बड़ी मानव बस्ती के प्रमाण

Mon, 03 Mar 2025 12:13 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
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तिलवाड़ा में टीले के उत्खनन में मिले पुरावशेष। फाइल फोटो
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बागपत। तिलवाड़ा के टीले पर उत्खनन में ताम्रपाषाण काल की तांबे की प्लेट व कलाकृति बनी तांबे की वस्तु समेत अन्य पुरावशेष मिलने पर बागपत में हजारों साल पहले बड़ी मानव बस्ती के प्रमाण पुख्ता हो रहे हैं। क्योंकि सिनौली में इस तरह से पांच हजार साल पुराने पुरावशेष व शवाधान गृह मिला था और तिलवाड़ा व सिनौली के बीच केवल दस किमी की दूरी है।
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तिलवाड़ा के आला टीले पर एएसआई के मेरठ मंडल कार्यालय की टीम पिछले ढाई महीने से उत्खनन कार्य करा रही हैं। यहां पर तीन ट्रेंच में खोदाई की जा रही हैं। मगर, तक एक ही ट्रेंच से अहम पुरावशेष सामने आ रहे हैं। यहां पर एक सप्ताह पहले तक मृद भांड, मिट्टी के सुराहीनुमा बर्तन, हड्डियां मिल चुकी थी तो चबूतरानुमा आकृति भी दिखाई दी।
इसके आधार पर शवाधान गृह होने की उम्मीद जताई गई। अब वहां तांबे की प्लेट, कलाकृति बनी तांबे की वस्तु समेत अन्य पुरावशेष मिले तो वहां शवाधान गृह मिलने की उम्मीद बढ़ गई हैं। इसका एक बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है कि वहां से दस किमी दूर सिनौली में इस तरह ही पुरावशेष मिले थे और उसके बाद पांच हजार साल पुराने रथ, कंकाल, तलवार समेत अन्य पुरावशेष मिलने से शवाधान गृह की पुष्टि हुई।
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अब तिलवाड़ा में मिले पुरावशेष भी करीब चार हजार साल पुराने होने का अनुमान है। वहां शवाधान गृह भी मिल जाता है तो सिनौली व तिलवाड़ा दोनों जगह शवाधान गृह मिलने पर यहां पांच हजार साल पहले बड़ी मानव बस्ती होने की पुष्टि हो जाएगी। इसको लेकर ही अब पुरातत्वविदों ने कार्य शुरू कर दिया है। इसके लिए ही पुरावशेषों की कार्बन डेटिंग कराई जाएगी और यह इतिहास की दृष्टि से बड़ी उपलब्धि होगी। इसके लिए ही एएसआई के अधिकारियों ने वहां खोदाई तेज करा दी।
ताम्रपाषाण काल में तांबे और पत्थर का होता रहा इस्तेमाल
जिस काल के तिलवाड़ा में पुरावशेष मिले हैं, वह ताम्रपाषाण काल के होने की बात एसएसआई की तरफ से कही गई हैं। एएसआई के महानिदेशक ने तिलवाड़ा से मिले पुरावशेषों को प्रथम जांच के बाद ताम्रपाषाण काल का माना है। उस समय लोग तांबे और पत्थर का इस्तेमाल करते थे। इसे ताम्र युग या पत्थर-तांबा चरण भी कहा जाता है।
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