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चौधरी चरण सिंह की 34वीं पुण्य तिथि पर विशेष-----

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बड़ौत। मसीहा को किसानों से बिछड़े हुए 34 साल बीत गए। उनके द्वारा किसान और मजदूर हितों के लिए किए गए कार्य आज भी लोगों के दिल में हैं। किसानों और मजदूरों का मानना है कि यदि उनके मसीहा आज जीवित होते तो उन्हें परेशानी भरे दिन देखने को नहीं मिलते।
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किसानों की आवाज उठाने वाले थे
पूर्व विधायक डॉ. महक सिंह के बेटे पूर्व विधायक डॉ. अजय कुमार ने बताया कि उन जैसा व्यक्तित्व राजनीति में फिर नहीं आया। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बाद दिल्ली में किसानों की आवाज उठाने वाला हमदर्द नहीं रहा। वह किसान और गरीब की चिंता करने वाले थे। कहा कि चौधरी साहब बहुत गंभीर और विचारशील थे। वे अत्यंत ईमानदार, किसानों और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने वाले थे।
आंख बंद करके भरोसा करते थे किसान
पूर्व प्रमुख सतेंद्र मलिक ने कहा कि चौधरी चरण सिंह के ऊपर किसान आंख बंद करके भरोसा करते थे। बड़े चौधरी ने भी उन्हें कभी निराश नहीं किया।। उन्होंने कहा कि किसान हितों के लिए उन्होंने बड़े कदम उठाए। वे अर्थशास्त्र के बड़े जानकार थे। वह देश के सबसे गरीब आदमी को ध्यान में रखकर राजनीति करते रहे और उसकी चिंता करते रहे।
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युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ाया
रालोद नेता संजीव मान ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह गांव, गरीब और किसानों के मसीहा थे। किसान घर में जन्मे और ताउम्र किसानों की लड़ाई लड़ते रहे। युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ाया। किसानों और मजदूरों के दिल में बड़े चौधरी की अमिट यादें हैं। उनके साथ लंबे समय तक जुड़े रहे लोगों के पास कभी न खत्म होने वाली बातें हैं।
उनकी पहचान ईमानदारी रही
रालोद प्रवक्ता अरुण तोमर बॉबी व किसान नेता विक्रम आर्य ने कहा कि ईमानदारी उनकी पहचान रही। यही वजह है कि जिस दिन उनका निधन हुआ तब उनके खाते में सिर्फ 470 रुपये थे। उन्होंने सरकार से चौधरी साहब को भारत रत्न देने की मांग की गई।
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