बड़ौत। सफाई कर्मचारी कोरोना काल में खुद को जान जोखिम में डालकर गांवों में सफाई कर रहे हैं। इस दौरान उनके पांव में न जूता और न हाथ में दस्ताना होता है। वहीं, अफसरों के पास भी इनकी सुरक्षा की कोई योजना नहीं है।
तहसील क्षेत्र अंतर्गत बड़ौत, बिनौली व छपरौली ब्लॉक हैं। उनमें करीब 150 सफाई कर्मचारी हैं। ये कोरोना महामारी के बीच गांवों में सफाई में जुटे हैं। सफाई कर्मचारियों में दीपक, सुनील, प्रमोद, आजाद, नीटू, देवेंद्र का कहना है कि उन्हें जूता और दस्ताने आदि मुहैया नहीं कराए गए हैं। जिस कारण मजबूरी में पैर नंगे सफाई करने के लिए नालियों और नालों में उतरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जूते व दस्ताने की मांग करने पर अधिकारी टालमटोल कर देते हैं। आरोप लगाया कि पिछले दो माह से वेतन तक नहीं मिला है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का नहीं हो रहा उल्लंघन
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना जरूरी है। नाले में उतरकर सफाई कार्य करने वाले कर्मचारियों को ऑक्सीजन मास्क, गम-बूट्स, वाटर प्रूफ दस्ताने ऑर वाटर प्रूफ वर्दी उपलब्ध कराना जरूरी है। बिना सुरक्षा उपकरण सफाई कर्मचारियों को मैनहोल में उतारना अपराध है। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। बिना सुरक्षा उपकरण के नाला सफाई के दौरान सफाईकर्मी की मौत होने पर परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा देना है।
ये बोले बीडीओ
इस संबंध में बीडीओ राहुल वर्मा का कहना है कि सफाई कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण मुहैया करा दिए हैं। फिलहाल ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है, यदि शिकायत आती है तो उक्त सफाई कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।