कुर्डी टीले पर उत्खनन करते पुरात्तवविद। स्रोत:ग्रामीण
बड़ौत में कुर्डी टीले पर की जा रही खोदाई में सोमवार को पुरातत्वविदों व शोधार्थियों को खंडित मृदभांड मिले हैं। जबकि यहां पर जलस्रोत की तलाश जारी है। कुर्डी टीले पर चल रही खोदाई में अभी तक भारतीय विरासत संस्थान की टीम को खास सफलता तो नहीं मिल पाई। मगर, मृदभांड, बड़ी ईंटों की दीवारें मिली हैं।
टीले पर 12 ट्रेंच बनाए गए हैं। इनमें से कुछ ही ट्रेंच ऐसे हैं, जो पुरावशेष उगल रहे हैं। बाकी तो टीले की ऊपरी सतह पर खंडित मृदभांडों के रूप में पुरावशेष बिखरे हुए हैं। यहां पर खोदाई के चलते करीब एक माह बीत गया है।
सोमवार को की गई खोदाई में पुरातत्वविदों व शोधार्थियों को ट्रेंचों से खंडित मृदभांड ही मिले हैं। खोदाई करते हुए पुरातत्वविदों का ध्यान टीले पर जलस्रोत तलाशने में लगा है। इसकी कई दिनों से तलाश जारी है, मगर अभी तक इनके हाथ सफलता नहीं लगी है। उम्मीद लगाई जा रही है कि जल्द ही परिणाम सामने आ सकते हैं।
वहीं तिलवाड़ा के आला टीले पर दिसंबर माह से खोदाई का काम चल रहा है। यहां पर खोदाई के लिए चार ट्रेंच बनाए गए थे। इनमें से केवल एक ट्रेंच से चबूतरानुमा आकृति, सुराहीनुमा मिट्टी के बर्तन, खंडित मृदभांड मिले हैं। इनके आधार पर यहां भी मानव बस्ती की उम्मीद लगाई जा रही है। टीले पर खोदाई कार्य धीमी गति से किया जा रहा है।