निर्वाण महोत्सव के दौरान टूटा हुआ मचान। संवाद।
बड़ौत/बागपत। बड़ौत में निर्वाण महोत्सव में भगवान आदिनाथ को मोक्ष कल्याण लड्डू चढ़ाने के लिए मचान पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती रही और बल्लियां मिट्टी में धंसती रहीं। बल्लियां इतनी धंस गईं कि पांच सेकेंड में मचान ध्वस्त हो गया और वहां हुए हादसे ने सभी को हिलाकर रख दिया।
निर्वाण महोत्सव में आस्था की लहर में जैन समाज के श्रद्धालु ऐसे बहे कि किसी ने उस जगह पर हर कदम पर मौजूद खतरे को नहीं भांपा। क्योंकि मानस्तंभ के परिसर में कुछ समय पहले ही मिट्टी का भराव कराया गया था और मिट्टी सही से दबाई भी नहीं गई थी। इसलिए मिट्टी पर दबाव पड़ते ही उसका नीचे जाना तय था। इस पर भी वहां कई दिन पहले पानी भर दिया गया था। इसके बावजूद उस मिट्टी में बल्लियों को गाड़ कर रस्सी से बांस बांधकर मचान बनाया गया था।
वह मचान भी मजबूत नहीं था और काफी पतली रस्सियों से बल्लियों व बांस बांधे गए थे। उस मचान की छह फिट चौड़ाई बनाई गई थी। इसमें तीन फिट को लड्डू चढ़ाने के लिए ऊपर जाने को रखा गया था और तीन फिट को नीचे उतरने के लिए रखा था। इतनी चौड़ाई जरूर की गई, मगर तब भी उसकी मजबूती का ध्यान नहीं रखा गया कि धार्मिक कार्यक्रम में उस पर भीड़ ज्यादा जा सकती है। उसकी ऊंचाई भी 65 फीट थी, जिसमें नीचे भी मजबूत पाइप या खंभे लगाने की जगह बल्लियां ही खड़ी करके रोका गया था। यह सभी कारण रहे कि मचान पर श्रद्धालुओं की भीड़ चली गई और मिट्टी में बल्लियां नीचे दबती चली गई। रस्सियां भी मजबूत नहीं होने से मचान पूरा झुक गया और केवल पांच सेकेंड में वह ध्वस्त होकर नीचे गिर गया।
वहां मौजूद वासु बताते हैं कि मचान एकदम से गिरा और कोई यह नहीं समझ सका कि आखिर यह क्या हो गया। बस नीचे गिरते ही चीख पुकार मच गई। नीचे खड़े श्रद्धालु व पुलिस कर्मी भी दब गए।