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दशलक्षण पर्व : उत्तम त्याग धर्म की पूजा अर्चना

Wed, 14 Sep 2016 01:39 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
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बड़ौत के बड़ा जैन मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
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बागपत। दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण विधान में मंगलवार को उत्तम त्याग धर्म की पूजा-अर्चना की। मूक  प्राणियों की सद्गति की मंगल कामनाएं करते हुए ण्मोकार महामंत्र का सामूहिक पाठ किया । इस मौके पर जैन साध्वी ने कहा त्याग के द्वारा ही जीवन में शांति संभव है।
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मंगलवार को दिगंबर जैन मंदिर में विधानाचार्य सतीश शास्त्री ने दशलक्षण पर्व के दौरान भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक और शांति धारा विधि विधान के साथ कराई। उत्तम त्याग की आराधना की गई। जैन समाज के सदस्यों ने मूक प्राणियों की सद्गति की मंगल कामना करते हुए ण्मोकार महामंत्र का सामूहिक पाठ किया। तत्वार्थ सूत्र का वाचन और प्रतिक्रमण संगीतमय आरती की गई।

गणिनी आर्यिका कीर्तिमति माता ने कहा जैन धर्म में त्याग धर्म का अति महत्व है। त्याग करने वाला मात्र पंडित, उपदेशक नहीं किंतु संत कहलाता है। संसार की प्रत्येक क्रिया त्याग मूलक है। वृक्ष फलों को, नदी पानी को, अग्नि उष्णता को और सूर्य प्रकाश को त्याग दें तो संसार की स्थिति भयावह हो जाएगी। त्याग ही जीवन में सम्मान और जीवन को ऊपर उठाता है।
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उन्होंने कहा त्याग करने वाला हाथ हमेशा ऊपर रहता है।  इसमें प्रहलाद जैन, आनंद जैन, सुधीर जैन, प्रमोद जैन, राकेश मित्तल, अशोक जैन, सुनील जैन, अमित जैन मौजूद रहे। सिसाना स्थित जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व पर श्री जी की पूजा अर्चना की। बताया  20 सितंबर को रथयात्रा महोत्सव मनेगा। इसमें सुनील जैन, अंजू, मांगेराम जैन, अजय जैन रहे। 

बड़ौत नगर में दशलक्षण पर्व के आठवें दिन  बड़ा जैन मंदिर में विहर्ष सागर महाराज के संसघ सानिध्य में चल रहे तेरहद्वीप महामंडल विधान में भगवान चंद्र प्रभु का अभिषेक का किया । इसके बाद इंद्र और इंद्राणियों ने पीत वस्त्र पहनकर विधानाचार्य नरेश चंद्र जैन शास्त्री ने नित्य नियम की पूजा, दशलक्षण धर्म की पूजा की, सोलहकरण की पूजा, भक्ति भाव से की गई।

तेरह द्वीप महामंडल विधान में अक्रतिम चेत्यालयों में विराजमान भगवानों की पूजा की । विधान में आठ पूजा की। बीच-बीच में विधानाचार्य ने विधान के महत्वों पर प्रकाश डाला। 

छोटा जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर स्वामी का अभिषेक कर पूजन किया। इसके बाद नित्य नियम की पूजा की गई। जैन अतिथि भवन में भी विशेष पूजा अर्चना की । दिगंबर जैन, बड़ा जैन मंदिर में कौन बनेगा ज्ञान पति नानक धार्मिक प्रश्न्नोत्तरी कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इसमें जैन धर्म से संबधित प्रश्न पूछे । 

 अतिथि भवन में सब खेलो सब जीतो नामक कार्यक्रम हुआ। इसमें विजेताओं को पुरस्कार वितरण किए। इसमें सुनील जैन, अतुल, सतीश, आलोक, विट्ठल, सुरेश जैन, मनोज, सुरेंद्र, प्रदीप, प्रवीण, राकेश आदि रहे।

 वहीं दिगंबर जैन अजित नाथ मंदिर मंडी में महामृत्युंजय विधान का आयोजन किया । प्रात: इंद्र ने जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा का गरम परा सुक जल से अभिषेक किया। शांति धारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र वैभव जैन को प्राप्त हुआ।

संगीतकार प्रयाग एंड पार्टी के मधुर भजनों पर इंद्र-इंद्राणियों ने भक्ति पूर्वक नृत्य किए। इसमें अशोक जैन, वरदान जैन, अनिल, प्रमोद, सशि जैन, त्रिस्ला जैन, इंद्राणी जैन आदि रहे।

बड़ौत के जैन अतिथि भवन में उत्तम त्याग धर्म पर बोलते विहर्ष सागर महाराज ने कहा आत्मा कल्याण में बाधक तत्वों का विसर्जन ही त्याग है। जिन-जिन बाह्य कारणों से आत्मा में विकार उत्पन्न हो रहा है। उन सभी कारणों को छोड़ना ही त्याग है। वस्तु को छोड़ने के साथ उसके प्रति ममत्व भाव छोड़ना ही त्याग है। 

 उन्होंने कहा दान बाह्य वस्तु का होता है बल्कि त्याग अंत करण वस्तु का होता है। दान ऊपरी विभूति का होता है और त्याग भीतरी विकारों का होता है। दान में लेने वाला छोटा और देने वाला बड़ा होता है। उन्होंने कहा  त्यागी त्याग से नहीं राग से डरता है।  उन्होंने त्याग धर्म अपनाने का आह्वान किया।
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