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अपनी अपनी ढपली अपना-अपना राग

Sun, 18 Oct 2015 11:30 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
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जिला एवं क्षेत्र पंचायत सदस्यों के तीन चरणों के चुनाव खत्म होने के बाद हर गांव की गली और चौपालों पर अपने-अपने आंकड़ों पर अपनी पसंद के प्रत्याशियों की जीत के दावे शुरू हो गए हैं। हर कोई अपनी अपनी ढपली और अपना अपना राग अलाप रहा है। कोई अपनी दलील एक प्रत्याशी की जीत के लिए प्रस्तुत कर रहा है तो दूसरा दूसरे की प्रत्याशी की जीत का दावा कर रहा है। हुक्कों की गुड़ग़ुड़ाहट के साथ ही वोट का प्रतिशत और जाति के आधार पर आंकड़े बनाए जा रहे हैं।
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ग्राम सिसाना, सरूरपुर, मवींकला, हमीदाबाद, काठा समेत अधिकांश गांवों में सिर्फ जीत, हार के आंकड़े लगाए जा रहे हैं और दलीलें दी जा रहीं हैं। गलियों, नुक्कड़, चौपाल और घेर में जोरदार बहस चल रही है। कोई किसी को एकतरफा बता रहा है तो कोई कांटे का मुकाबला। ग्राम सिसाना में चौहानों के घेर में इसी तरह की गरमागरम बहस जारी थी। हरपाल सिंह ने एक प्रत्याशी का पक्ष लेते हुए कहा कि आधे से ज्यादा गांव का एकतरफा वोट गया है, यहां से तो जीत उसी की पक्की है, तो दूसरा बोला कि उसकी वोट तो उसके परिवार से लड़ रहा प्रत्याशी ही काट रहा है।

भाई यहां तो तीसरा ही निकल जाएगा। निवाड़ा में भी इसी तरह की चर्चाओं का बाजार गरम रहा। यहां चर्चा चल रही थी कि एक मुस्लिम प्रत्याशी खड़ा है, तो बिरादरी का वोट तो जाना ही है, तभी दूसरा बोला कि नहीं यहां पर एक पार्टी से जो प्रत्याशी खड़ा है उस पर ही सारा वोट गया है। यहां से तो उसकी जीत पक्की समझो। सरूरपुर में तो चर्चा यही रही कि यहां तो एकतरफा वोट दिग्गज प्रत्याशी को गया है। कहीं और से जीते न जीते यहां से तो उसकी ही जीत है।
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सिर्फ जीत हार के इस मुद्दे पर ही नहीं यहां तो जिला पंचायत अध्यक्ष चुने जाने को लेकर भी चर्चा जमकर होती रही। कुछ ने कहा कि इस बार बदलाव होना है और नया ही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठेगा, तो दूसरा बोला कि पहले को कम नहीं आंका जा सकता। उसकी स्थिति काफी मजबूत है। यहां खरीद-फरोख्त भी जमकर होगी तो वह किसी में पीछे भी नहीं है। एक नवंबर के बाद ही सामने आ पाएगा कि किसके आंकड़े कहां तक सटीक रहे। हालांकि जब तक परिणाम नहीं आ जाते, तब तक गांवों में चर्चाओं का माहौल गरम ही रहेगा। हर प्रत्याशी की जीत और हार का तुलनात्मक विश्लेषण किया जाता रहेगा।
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