फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खाते वक्त बच्चे को न डांटे, प्यार से समझाएं

विज्ञापन
विज्ञापन
बाल रोग चिकित्सक की मानें तो कविता और कहानियों से माध्यम से समझाएं भोजन का महत्व
विज्ञापन

बड़ौत। हर मां के लिए अपने बच्चे को खाना खिलाना एक दिमागी कसरत की तरह होता है। किसी बच्चे को उसके खाने में आने वाले सब्जियों के लच्छे पसंद नहीं होते, तो किसी को मसाले पसंद नहीं आते। कोई सिर्फ चावल ही पसंद करता है, तो कोई सिर्फ दही पर ही गुजारा करने को आमादा मिलेगा। ऐसे में खाना-खिलाना प्यार कम, डांट डपट ज्यादा हो जाता है। मगर, डांट या चिंता से कुछ नहीं होने वाला। इसके लिए कुछ अलग तरह से कोशिश करनी होती है।
क्या कहते है बाल रोग चिकित्सक
पूर्व सीएचसी अधीक्षक बड़ौत डॉ. अजेंद्र मलिक का मानना है कि बच्चों को कहानियों या कविताओं के माध्यम से स्वास्थ्यवर्धक खाने के महत्व के बारे में बताएं। रोटी से ज्यादा उनमें सब्जियों के प्रति रुचि बनाएं। इसके लिए आपको चुकंदर, पालक या गोभी परांठे जैसे प्रयोग भी करने पड़ें, तो करिए। बच्चे को खाना खिलाने का उद्देश्य उसे मोटा करने से ज्यादा स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखना होना चाहिए। बताया कि जब बच्चे खाना खा रहे हों, तो उन्हें कोई झिड़की या डांट न मिले। वरना खाने का असर नकारात्मक ही होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन जैन का कहना है कि बच्चों को एक बार में सब कुछ खिलाना मुश्किल होगा, इसलिए कुछ अंतराल पर खिलाएं। इसमें एक क्रम जरूर बनाएं। जैसे कि दिन भर में तीन बार भोजन, तो तीन बार स्नैक्स आदि जैसा छोटा-मोटा आहार। इससे एक अनुशासन भी बना रहेगा और उसकी पोषण संबंधी आवश्यकता भी पूरी होती रहेगी। अच्छा यही होगा कि जब माता-पिता खाना खाएं, तो बच्चे को साथ खिलाएं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें