सिंचाई विभाग दाहा डिविजन यांत्रिक वर्कशॉप जर्जर हालत में
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कई सरकारी नलकूप ठप, फसलों में सिंचाई के पानी की समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। कृष्णा और हिंडन नदियों के दोआबा क्षेत्र को चौगामा क्षेत्र कहा जाता है। सदियों से यह क्षेत्र पानी की कमी झेल रहा है।
वर्ष 1970 से पूर्व यहां पर खेतीबाड़ी केवल वर्षा पर ही निर्भर थी। रेहट से किसान काफी कम भूमि में ही फसल उगा पाते थे। बाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने चौगामा क्षेत्र के प्रत्येक गांव में राजकीय नलकूपों की स्थापना कराई , ताकि यहां के किसानों के खेतों को पानी उपलब्ध कराया जाए। इन नलकूपों के संचालन के लिए दाहा में एक यांत्रिक और सिविल डिवीजन की स्थापना भी की। यहां पर दो अवर अभियंता, छह मैकेनिक और करीब 60 ऑपरेटर तैनात थे। उस समय इस डिवीजन में 72 नलकूप संचालित थे। इन नलकूपों के कारण चौगामा क्षेत्र के किसानों के खेतों में फसलें लहलहाने लगी और यह क्षेत्र समृद्धि की और बढ़ने लगा। 1967 में इन्हीं नलकूपों के कारण गांव-गांव में बिजली पहुंच गई। उस समय कुछ किसानों ने निजी नलकूप भी लगाने शुरू कर दिए। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने 1980 के बाद इस डिवीजन की उपेक्षा करनी शुरू कर दी और आज यहां केवल 40 नलकूप ही संचालित हैं। जबकि करीब 30 नलकूप ठप हो चुके हैं। डिवीजन की वर्कशॉप और कार्यालय वीरान हो चुके हैं। यहां कोई मैकेनिक भी नहीं है। एक ऑपरेटर पर करीब पांच नलकूपों की जिम्मेदारी है। यदि किसी नलकूप का मोटर या अन्य सामान खराब हो जाता है तो उसे मरम्मत के लिए मेरठ के वर्कशॉप में भेजा जाता है। आने-जाने और उसे ठीक कराने में महीना लग जाता है। इस बीच किसानों की फसल बर्बाद हो जाती हैं। यहां जो सिंचाई विभाग का निरीक्षण भवन है, वह भी जर्जर हालत में पहुंच चुका है। चौगामा विकास ट्रस्ट के अध्यक्ष जगपाल सिंह ने सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता मेरठ से मिलकर इस डिवीजन की कायाकल्प कराने, निरीक्षण भवन का पुनरुद्धार करने, मेरठ की बजाय यहां पर आंतरिक शाखा खोलने की मांग की है। क्षेत्र के किसान रणकुमार, रमेश, मदन पाल आदि का कहना है कि सिंचाई विभाग को इन नलकूपों की तरफ ध्यान देना चाहिए, ताकि चौगामा क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए सुलभ पानी मिल सके।
वर्जन-
बागपत जिले में यांत्रिक डिवीजन शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मेरठ डिवीजन से ही बागपत का कार्य होता है। निरीक्षण भवन के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। जो अभी विचाराधीन है। - सौरभ चौधरी, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग