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उत्तम संयम धर्म पर चर्चा

Thu, 24 Sep 2015 12:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बड़ौत
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दशलक्षण पर्व पर जैन अनुयायियों ने उत्तम संयम धर्म को अंगीकार कर सुगंध दशमी पर्व धूमधाम से मनाया। सभी जैन मंदिरों में जैन अनुयायियों ने धूप चढ़ाकर अपने कर्मों का क्षय किया। वहीं, जैन मंदिरों में पाठ के कार्यक्रम हुए और विशेष पूजा-अर्चना की गई।
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अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में छुल्लक ध्यान सागर महाराज के सानिध्य में सुगंध दशमी पर्व धूमधाम से मनाया गया। महावीर विधान में पूजा कर उत्तम संयम धर्म अंगीकार किया। पूजा का शुभारंभ अजितनाथ भगवान की प्रतिमा के जलाभिषेक से हुआ।

शांतिधारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र सुनील जैन को प्राप्त हुआ। कुबेर इंद्र का सौभाग्य वकीलचंद जैन को मिला। पंडित नरेशचंद जैन शास्त्री के निर्देशन में सुगंध दशमी पर्व पर भगवान शीतलनाथ की पूजा की गई।
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नित्य नियम की पूजा के बाद भक्ति संगीत के साथ महावीर भगवान विधान का आयोजन हुआ। विधान में अशोक जैन, वरदान जैन, जयप्रकाश जैन, अनिल जैन, त्रिस्ला जैन, इंद्राणी जैन, सरला जैन, शशि जैन, रुक्मिणी जैन, मधु जैन, सुनिता आदि उपस्थित रहे।   

बड़ा जैन मंदिर में बुधवार को सुबह जैन अनुयायी सुगंध दशमी पर्व पर पूजा अर्चना की। उन्होंने भगवान के दर्शन कर मंदिरों में धूप चढ़ाकर अपने कर्मों का क्षय किया। प्रत्यक्षमति माता के सानिध्य में चल रहे तेरह दीप महामंडल विधान में श्रद्धालुओं ने पीत वस्त्र धारण कर चंद्र प्रभु भगवान का अभिषेक किया।

इस अवसर पर अशोक जैन, सुदेश जैन, अतुल जैन, मनोज जैन, सुभाष जैन, सौरभ, सुनील जैन, कमल जैन, नीरज जैन, पंकज जैन, आनंद जैन, रमेश जैन, अमित जैन, अनुज, विपिन आदि का सहयोग रहा।
संयम जीवन को दिशा प्रदान करता है

बड़ौत। जैन अतिथि भवन में आर्यिका प्रत्यक्षमति माता ने कहा कि संयम जीवन को दिशा बौद्ध प्रदान करता है। संयम के अभाव में इंद्रियां अनेक प्रकार की अलग-अलग मांग करती है। संयमित जीव संसार में रहकर भी संसार से परे होता है। मन को स्थिर करने का प्रयास की संयम है।

जीवन को सफल बनाओ
अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा में छुल्लक ध्यान सागर महाराज ने कहा कि जिस मनुष्य ने अपने जीवन में संयम धर्म धारण कर लिया है, उसका मनुष्य जीवन सफल है। मन की प्रवृत्ति को समझकर हम इसके मालिक बने गुलाम नहीं।

सत्य के मार्ग पर चलो
जैन मुनि सत्यप्रकाश ने कहा कि सत्य धर्म की आराधना से जीवन का कल्याण होता है। बुधवार को जैन स्थानक नया बाजार में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा कि सत्य के मार्ग पर चलने से ही मानव जीवन का कल्याण होता है। उन्होंने कहा कि छोटा बच्चा कभी झूठ नहीं बोलता।

पांच महाव्रतों में चौथा व्रत अहिंसा है। भगवान महावीर स्वामी का संदेश है कि लोगों को हिंसा से सदैव दूर रहना चाहिए। सत्य धर्म की आराधना करने से जीवन का कल्याण होता है। अजय मुनि ने कहा कि बृहस्पतिवार को मंडी के जैन स्थानक में विहार कर जाएंगे।

उन्होंने सेवा करने वालों में खचेडू मल, भगत हलवाई, कमल, शिवा, पुष्पेंद्र की सराहना की। जयप्रकाश, सोहनपाल, राजीव, कालू जैन, गौरव, हंस कुमार जैन, इंद्राणी, पूनम, मोनिका आदि शामिल रहे।
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