आस्था और मस्ती ः यमुना में कम पानी होने के बावजूद स्नान करते श्रद्धालु।
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जेठ के दशहरा के मद्देनजर मंगलवार को यमुना पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। पक्का घाट, निवाड़ा पुल और यमुना किनारे गांव में पूरे दिन लोगों की भीड़ लगी रही। यमुना में पानी न होने पर श्रद्धालुओं में मायूसी छा गई। इस दौरान कुछ लोगों ने तो यमुना के रेत में ही डुबकी लगा दी।
जेठ दशहरा पर्व पर यमुना पर स्नान करने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु आते है। मंगलवार सुबह चार बजे से ही यमुना पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। शाम तक यहीं सिलसिला जारी रहा। यमुना में पानी न होने पर श्रद्धालुओं में मायूसी छा गई।
यमुना में बने गड्ढे में एकत्र गंदे पानी में ही महिला-बच्चों ने डुबकी लगाई। कुछ श्रद्धालुओं ने तो यमुना के रेत में भी डूबी लगा डाली। उन्होंने प्रसाद चढ़ाकर यमुना मैया से मन्नत मांगी।
इस दौरान लोगों ने केंद्र और प्रदेश सरकार को जमकर कोसा। उन्होंने कहा यमुना को बरसाती नाला बना दिया है। बरसात आती है तो पानी आ जाता है। बरात चली जाती है तो पानी चला जाता है। कुछ साल पहले यमुना में पवित्र जल रहता था। लोग जल में डुबकी लगाकर मन्नत मांगते थे।
साथ ही जल का स्तर भी बना रहता था, लेकिन अब हालत बदल गए हैं। यमुना में एक बूंद भी पवित्र जल नहीं है। कुछ श्रद्धालु तो मंगलवार को बगैर स्नान किए ही अपने घर लौट गए। उन्होंने कहा कम से कम जेठ के दशहरे पर तो यमुना में पानी छोड़ देना चाहिए था।
ज्येष्ठ दशहरा मनाया
खेकड़ा। नगर क्षेत्र में मंगलवार को ज्येष्ठ दशहरा पर्व के चलते भक्तों ने सुबह आठ बजे से शाम तक मुख्य मार्गों, चौराहों एवं धार्मिक स्थलों पर शीतल मीठे पेयजल की प्याऊ लगाकर लोगों को पानी पिलाया।