धूमधाम से शुरू हुुआ दशलक्षण पर्व, श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना
13 द्वीपों की पूजा की गई और अर्घ्य भी चढ़ाए, णमोकार मंत्र का जाप किया
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। दशलक्षण पर्व का शुक्रवार से शुभारंभ हो गया। पहले दिन जैन अनुयायियों ने प्रथम धर्म उत्तम क्षमा को अंगीकार किया। शासन की ओर जारी कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए 13 द्वीपों की पूजा की गई और अर्घ्य भी चढ़ाए। श्रद्धालुओं ने शारीरिक दूरी का ध्यान रखते हुए णमोकार महामंत्र का जाप भी किया।
श्री 1008 अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर मंडी में उत्तम क्षमा धर्म की पूजा के साथ जैन श्रद्धालुओं ने शांति विधान का आयोजन किया। सुबह छह बजे पीत वस्त्रधारी जैन श्रद्धालुओं ने अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का गर्म प्रासुक जल से अभिषेक किया। शांतिधारा का सौभाग्य सोधर्म इंद्र राजेश जैन को प्राप्त हुआ। विधान का शुभारंभ झंडारोहण से शशि जैन ने किया। अजितनाथ भगवान का चित्र अनावरण सुरेश जैन और दीप प्रज्ज्वलन मुकेश जैन बजाज ने किया। ग्वालियर से पधारे विधानाचार्य पंडित चंद्रप्रकाश जैन के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने नित्य नियम पूजन में समुच्चय देव शास्त्र गुरु पूजन, अजितनाथ भगवान पूजन और शांतिनाथ भगवान की पूजन की। शांतिनाथ विधान की पूजन में सोधर्म इंद्र द्वारा मंडल पर 108 अर्घ्य समर्पित किए गए। संगीतकार अनुपमा जैन ग्वालियर के भजनों को विशेष रूप से सराहा गया। विधान में मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, वकील चंद जैन, अमित जैन, पंकज जैन, विपिन जैन, डिंपल जैन, इंद्राणी जैन, त्रिशला जैन आदि उपस्थित रहे। शाम को सात बजे मंदिर जी में आरती हुई और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि शनिवार को मंदिर जी में पंच परमेष्ठि विधान का आयोजन किया जाएगा।
क्षमा कर देना ही उत्तम धर्म : पंडित नेमचंद शास्त्री
बड़ौत। पर्युषण महापर्व के प्रथम दिन श्री 1008 पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू रोड में तेरह द्वीप महामंडल विधान का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम श्रीजी का प्रक्षालन अभिषेक और शांतिधारा की गई। तेरह द्वीप विधान की तीन पूजा, चार सिद्ध, सोलह रूपाचल, आठ वक्षार की पूजा की गई तथा बत्तीस अर्घ्य चढ़ाए गए। पंडित नेमचंद शास्त्री ने कहा कि आज पर्युषण महापर्व का प्रथम दिन उत्तम क्षमा दिवस है। उत्तम क्षमा हमें धर्म का ज्ञान देता है। व्यक्ति का जब क्रोध व अन्य कषाय समाप्त हो जाती है, तब उत्तम क्षमा गुण प्रकट हो जाता है जो व्यक्ति सामर्थ्यवान होते हुए अपने से निर्बल व्यक्ति को माफ कर देता है। मीडिया प्रभारी आदिश जैन ने बताया कि शाम को श्री भक्तामर जी का विधान किया गया। तत्पश्चात संगीतमय आरती की गई। कार्यक्रम में सतेंद्र जैन, नरेश, अनिल, अमन, मुकेश, आदिश, संजीव, पवन, सुदेश, अनीता, गीता, पूनम शामिल रहे। उधर दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में पहले दिन श्रद्धालुओं ने 13 द्वीपों की पूजा की और अर्घ्य चढ़ाए। डॉ श्रेयांश जैन के निर्देशन में पीत वस्त्र पहने श्रद्धालुओं ने विधि विधान से पूजा अर्चना की। शांतिनाथ मंदिर और पार्श्वनाथ मंदिर बड़ौली रोड में भी श्रद्धालुओं ने उत्तम क्षमा धर्म अंगीकार किया। उधर, देर शाम होते ही जैन मंदिर प्रकाश से जगमगा गए। मंदिरों की भव्य तरीके से सजावट की गई है। भगवान की मंगलमय आरती उतारकर धर्म लाभ उठाया गया।
हिंसा, झूठ, चोरी आदि पापों का त्याग करें
बड़ौत। श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर में भी सर्वप्रथम दशलक्षण पर्व की पूजा-अर्चना की। इसके बाद जिनेन्द्र भगवान की पूजा हुई। प्रक्षालन व नमन किया गया। झंडारोहण का सौभाग्य दिगंबर जैन पालीटेक्निक कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य नरेश चन्द जैन व उनके परिवार को मिला। इस अवसर पर पंडित सुमत प्रसाद जैन ने बताया कि हिंसा, झूठ, चोरी आदि पापों का त्याग करें। इससे आत्मा की शुद्धि होती है। सायंकाल भगवान की आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। इस अवसर पर अध्यक्ष विनोद कुमार एडवोकेट, प्रेमचन्द जैन, भूषण जैन, वीरेंद्र कुमार जैन, सुनील कुमार जैन, राकेश कुमार जैन, नितेश जैन, मंजू जैन, सरिता जैन शामिल रहे।