एनजीटी की सख्ती और महंगाई की मार से मकान बनाना लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। भट्टों पर ईंट नहीं मिल रही है। पिछले एक माह में ईंट की कीमतों में एक हजार से अधिक रुपये की वृद्धि हुई है। अन्य भवन सामग्री के दाम में भी इजाफा हुआ है।
दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को देखकर एनजीटी ने ईंट भट्टों के संचालन पर प्रतिबंध लगा रखा है, इसलिए जनपद के करीब साढ़े चार सौ भट्टे बंद है। इसका नतीजा है कि भट्टों पर ईंट नहीं हैं।
जिन भट्ठों पर ईंट हैं। उनके संचालक मन माफिक ईंट के रेट वसूल रहे हैं। पिछले एक माह में ईंट के दाम में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा सीमेंट, बजरी, डस्ट, बालू और सरिया के रेट में भी बढ़ोतरी हुई है। लोगों को मकान बनाना मुश्किल हो गया है।
मेरठ रोड पर दुकानों का निर्माण करा रहे रवि चौहान ने बताया कि भवन सामग्री के रेट में अचानक ही इजाफा हुआ है। एक माह पहले उसको 3500 रुपये हजार ईंट मिली, अब उसको 4500 रुपये के रेट में बड़ी मुश्किल से ईट मिल रही है।
ईंट भट्टा मालिक अरविंद उर्फ बिल्लू राणा ने कहा भट्ठे चालू न होने से ईंटों की कमी हो रही है। इसी कारण ईंटों के रेट बढ़ रहे हैं। भवन सामग्री के विक्रेता सतीश कुमार कहना है कि सीमेंट और अन्य सामान के रेट में बढ़ोतरी हुई है, इस कारण ग्राहक भी नहीं आ रहे हैं। सहीं कहना सरिया विक्रेता बंटी मित्तल का है।
निर्माण सामग्री के दामों में अंतर
सामग्री पहले के रेट अब के रेट
ईंट अव्वल 3000 4500
दोयम (नरम) 2700 4300
चटका 2200 2700
लाल पेटी 2000 2500
पिल्ली 1200 1400
सीमेंट 280-300 290-310
बजरी- डस्ट 80-85 95-100
नोट : ईट के रेट प्रति हजार, सीमेंट का प्रति बोरा, बजरी का प्रति कुंतल है।