फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'दहिया जी, साक्षी को पहलवान बना देना'

Fri, 19 Aug 2016 12:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
विज्ञापन
कोच ईश्वर दहिया के साथ साक्षी मलिक (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
साल 2004, रोहतक स्टेडियम में कुश्ती के कोच ईश्वर दहिया का अखाड़ा। एक महिला अपनी मासूम सी बेटी को लेकर पहुंची। बोली, दहिया जी ये साक्षी है, इसे पहलवान बना देना। तब ईश्वर दहिया ने कहा था मेहनत करोगी तो दुनिया देखेगी।
विज्ञापन


बारह साल बाद रियो डि जेनेरियो में जब साक्षी ने देश को पहला पदक दिलाया तो देश ने उसी मासूम सी पहलवान को देखा और पलकों पर बैठा लिया। 

जमीन बेचकर ईश्वर दहिया ने रोहतक में कुश्ती के अखाड़े की शुरूआत की थी। उनके पिता कुश्ती के बेहद शौकीन थे। पहले लड़कों को कुश्ती के दांव-पेंच सिखाए। मेरठ में हुई ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी कुश्ती में भी वह अपने अखाड़े के पहलवानों के साथ पहुंचे थे।

बृहस्पतिवार को फोन पर बातचीत में उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में उनके अखाड़े में महिला पहलवानों ने दांव-पेंच सीखने शुरू किए। कॉमनवेल्थ में पदक दिलाने वाले सुमन कुंडू को ईश्वर दहिया ने ही तराशा था। 
विज्ञापन


साल 2004 में साक्षी मलिक की मां सुदेश उसे लेकर ईश्वर दहिया के पास ही पहुंची थी। दहिया के अखाड़े में अनुशासन प्राथमिकता है। हमेशा मुस्कुराने वाले शख्स का कहना है कि हमने सिर्फ मेहनत की। पूरा ध्यान कुश्ती पर था।

रियो रवाना होने से पहले भी साक्षी को सिर्फ यह कहकर भेजा था कि पीछे नहीं हटना। मौका मिला है, रोज - रोज ऐसे अवसर नहीं मिलते हैं। साक्षी की खास बात यही है कि वह कभी हार नहीं मानती। 
विज्ञापन


कांस्य के लिए हुए रेपचेज राउंड में भी उसने यही दिखाया। पिछड़ गई थी, लेकिन फिर वापसी की और महिला कुश्ती में देश को पहला पदक दिलाने का काम किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें