बागपत। गांवों में स्वच्छता के लिए करोड़ों रुपये खर्च हो गए। इसके बावजूद भी गांवों में गंदगी ही दिखाई देती है। यह किसी एक गांव की स्थिति नहीं है, बल्कि अधिकतर गांवों में ऐसा ही हाल है। इस तरह सवाल यह उठ रहा है कि आखिर स्वच्छता के लिए करोड़ों रुपये कहां खर्च हुए।
स्वच्छ भारत मिशन फेज-टू के तहत गांवों को ओडीएफ प्लस बनाने के लिए वर्ष 2023 में 66 गांवों के लिए 30 करोड़ से ज्यादा रुपये जारी किए गए थे। जिससे गांवों में खाद के गड्ढे, आरसीसी सेंटर, शॉकपिट, पानी निकासी की नाली, नाले, कूड़ा एकत्र करने को ई-रिक्शा खरीदने समेत अन्य कार्य कराए जाने थे। जिससे गांव में किसी भी जगह कूड़ा व जलभराव की समस्या न रहे और गांवों में स्वच्छता रहे। स्वच्छ भारत मिशन फेज-टू के तहत मिला बजट अधिकतर जगह खर्च कर दिया गया है। इसके बावजूद गांवों में हालात नहीं सुधरते दिख रहे हैं। गांवों में आज भी जगह-जगह गंदगी है तो जलभराव की समस्या भी बनी रहती है।
आखिर कहां खर्च हुआ करोड़ों का बजट
स्वच्छ भारत मिशन फेज-टू के तहत आए बजट को खर्च करने को लेकर पहले ही सवाल उठ रहे हैं और इसमें कई जगह घपला भी सामने आ रहा है। मगर गांवों के हालात देखकर यह सवाल उठ रहा है कि स्वच्छता के लिए मिला बजट आखिर कहां खर्च हुआ और इसकी सभी गांवों में जांच होने पर ही स्थिति साफ होगी।
गांवों में लगे हैं गंदगी के ढ़ेर
ढिक़ौली गांव के नरेंद्र का कहना है कि गांव में सड़क किनारे गंदगी का ढ़ेर लगा हुआ है। जिससे वहां से निकलने तक में परेशानी होती है। गांव में कई जगह कूड़ा भी रहता है। इस तरह स्थिति खराब है। वाजिदपुर गांव के विशाल ने बताया की गांव में गंदगी के ढ़ेर लगे हुए हैं और बाईपास की तरफ नहर का रास्ता पूरा खराब पड़ा है। दूषित पानी भी गांव के पास ही खुले में फैला हुआ है।
यह बोले प्रधान
हमारे गांव में जितना भी बजट आया था, उससे कुछ खाद के गड्ढे बनवाए गए और कार्य योजना में शामिल कार्य कराए गए। गांव में नियमित सफाई कराई जा रही है। जहां गंदगी है, वहां विशेष ध्यान देकर सफाई कराई जाएगी। संदीप ढ़ाका, प्रधान ढिकौली
गांव में पिछले दो महीने से सफाई कर्मचारी नहीं आ रहा है, जिस कारण पूरे गांव की सफाई नहीं हो रही है। मैं ने डीपीआरओ को सफाई कर्मचारी की शिकायत की है। गांव में जल्द स्वच्छता होगी। अश्वनी, प्रधान वाजिदपुर
वर्जन
गांवों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत काफी बजट आया था। उसके बाद भी गांवों में गंदगी है और जलभराव की समस्या है तो उसको दिखवाया जाएगा। किसी जगह कार्य नहीं कराया गया है तो उसको भी दिखवाया जा रहा है। अरूण अत्री, डीपीआरओ