सहारनपुर। शिवालिक की तलहटी में स्थित खारा जल विद्युत परियोजना पर संकट मंडरा रहा है। पहाड़ियों से मलबा गिरने की आशंका के चलते सुरक्षा दीवार बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है, जिसमें करीब दो करोड़ की लागत आएगी। मलबा गिरने की वजह से न केवल परियोजना को नुकसान होने का खतरा हैं, बल्कि विद्युत उत्पादन भी प्रभावित होने का डर है।
खारा जल विद्युत परियोजना की स्थापना वर्ष 1992 में करीब 225 करोड़ रुपये की लागत से हुई थी। इसमें 24-24 मेगावाट की तीन टरबाइन लगाई गई हैं, जिससे कुल 72 मेगावाट बिजली का प्रतिदिन उत्पादन होता है। इसके बाद बाबैल और बेलका नामक दो अन्य परियोजनाएं भी जुड़ीं, जिनसे 3-3 मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन जुड़कर कुल उत्पादन 78 मेगावाट हो गया।
परियोजना से उत्पादित बिजली की आपूर्ति कलसिया 220 केवीए और मोहनपुर गाड़ा 220 केवीए सब-स्टेशनों पर की जा रही है। परियोजना को जल आपूर्ति उत्तराखंड के कुल्हाल क्षेत्र से 17 किलोमीटर लंबी शक्ति नहर के माध्यम से होती है। यह नहर पहाड़ों से होकर गुजरती है।
इसमें बरसात के दौरान कई बार पहाड़ियों का मलबा आ चुका है। पहाड़ियों के मलबे की वजह से परियोजना को भारी नुकसान न हो इसके लिए यह सुरक्षा दीवार की कवायद की जा रही है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है।