बागपत। आर्यन हत्याकांड पुलिस के लिए अबूझ पहेली बन गया है। तमाम टीमें लगी हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात। किसी शातिर ने ऐसा व्यूह रचा है, जिसमें घुसने का रास्ता पुलिस को अभी तक नहीं मिला है। कौन करीबी है, जिसने मासूम आर्यन को सैकड़ों लोगों के बीच से निकालकर बदमाशों के हाथ में पहुंचा दिया।
भड़ल के आर्यन हत्याकांड में अब तक पुलिस को कोई भी तीर निशाने पर नहीं लगा। सवाल है कि आखिर कांवड़ सेवा शिविर से सैकड़ों लोगों के बीच से 10 साल का आर्यन कैसे अपह्त हुआ। कौन करीबी था, जिसने इतने लोगों की आंख में धूल झोंककर मासूम को हत्यारों तक पहुंचा दिया। आर्यन को कहां और किसे सौंपा जिन्हें आर्यन मिला, वह उसे कहां लेकर गए।
मेरठ और गाजियाबाद से मोबाइल पर फिरौती किसने मांगी। आर्यन को भीड़ से ले जाने वाला, अपहरणकर्ता और फिरौती मांगने वाले एक ही थे या फिर अलग-अलग। अगर वह अलग-अलग थे तो कैसे संपर्क में रहे। किस तरह हर बात एक-दूसरे तक पहुंचाई गई। मासूम की हत्या कहां हुई, अपहरण के कितने घंटे बाद की। क्या हत्या करने के बाद ही फिरौती के लिए फोन किया था। शातिर जानता था पुलिस कांवड़ मेले में उलझी होगी, जिस कारण उसका काम आसान हो गया।
क्या किसी ने भी नहीं देखा आर्यन
पुलिस के लिए सबसे परेशान कर देने वाली बात यह है कि सैकड़ों लोगों के बीच से आर्यन को जाते हुए किसी ने नहीं देखा। पुलिस को कोई यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि आखिर बार आर्यन किसके साथ देखा गया था। किस तरफ गया था। इस सवाल का जवाब पुलिस को नहीं मिल पा रहा है, इस कारण वारदात के तार भी नहीं जुड़ पा रहे हैं।
अब इस लाइन पर पुलिस की जांच
अब तक की जांच में पुलिस का मानना है मासूम का अपहरण हत्या के लिए ही किया गया था। किसी करीबी ने यह वारदात कराई, लेकिन अंजाम देने वाले जरूर कोई शातिर थे। हत्या करने वाले और कराने वाले के बीच की कड़ी अब तक पुलिस नहीं जोड़ पाई है।
वारदात के खुलासे के लिए कई टीमें लगी हैं। खुलासा किया जाएगा। पुलिस किसी भी निर्दोष व्यक्ति को जेल नहीं भेजेगी। हर पहलू पर जांच चल रही है। अपहरण और हत्या की साजिश रचने वाले को बेनकाब किया जाएगा।
- पूनम, पुलिस अधीक्षक