बागपत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर अमर्यादित टिप्पणी करने के केस के मुख्य आरोपी गुड्डू समेत तीन आरोपियों ने जुवेनाइल कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इससे पहले जेल जा चुके तीन आरोपियों की सीजेएम ने जमानत याचिका खारिज कर दी है।
इस केस के तीन आरोपी गुड्डू पुत्र सत्तार निवासी गोयला (मुजफ्फरनगर), समीर पुत्र शकील और नासिर पुत्र साजिद ने पुलिस को चकमा देकर किशोर न्याय बोर्ड बागपत में मंगलवार को आत्म समर्पण कर दिया। पुलिस को इसका पता भी नहीं लगा। गुड्डू केस का मुख्य आरोपी है। उसने ही इस वीडियो को बनाने का प्लान तैयार किया था। बाद में सभी ने मिलकर वीडियो तैयार की। कार्यवाहक दोघट थाना प्रभारी यशपाल सिंह का कहना है कि ये तीनों आरोपी नाबालिग हैं। इसलिए आरोपियों ने जुवेनाइल कोर्ट में सरेंडर किया है। तीन आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई है। आरोपी समीर पुत्र पप्पू निवासी बामनौली अभी फरार चल रहा है। उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है।
जमानत याचिका खारिज
बागपत। जेल गए आरोपी राशिद, शौकीन और पप्पू की ओर से सीजेएम कोर्ट में जमानत अर्जी लगाई गई थी। वादी की ओर से अधिवक्ता रामपाल सिंह नेहरा ने केस की कोर्ट में बहस की। अधिवक्ता के मुताबिक कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
दो आरोपियों के पिता भी जा चुके जेल
बागपत। इस मामले में आरोपी समीर के पिता पप्पू उर्फ शकील व वसीम के पिता नूरद्दीन को पुलिस ने केस की साजिश रचने के आरोपी मानते हुए जेल भेज दिया था।
यह था मामला
बागपत। दोघट क्षेत्र के गांव बामनौली के टीले पर छह माह पूर्व छह युवकों ने वीडियो बनाई थी। उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा नेता पर अशोभनीय टिप्पणी की थी। बाद में वीडियो को वायरल कर दिया गया था। पता चलने पर अफसरों के आदेश पर थाने में अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पुलिस की अगले दिन ही वीडियो बनाने वालों का पता लगा लिया था।
बामनौली की गतिविधियों पर पुलिस की नजर
बागपत। इस घटना को लेकर गांव का माहौल न बिगड़े इसलिए गांव की हर गतिविधियों पर पुलिस की नजर है। खुफिया तंत्र गांव में डेरा डाले हुए है, जो पल-पल की अफसरों को जानकारी दे रहे हैं।
दंगे में भी सुर्खियों में रहा बामनौली
बागपत। मुजफ्फरनगर में सितंबर 2013 में हुए दंगे के समय भी बामनौली गांव सुर्खियों में रहा है। गांव की महिला अख्तरी की हत्या कर दी गई थी। इससे गांव में सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो गया था। यह केस अभी भी कोर्ट में विचाराधीन है।