वर्तमान पेराई सत्र में किसानों के गन्ने का भुगतान नहीं करने पर मलकपुर चीनी मिल की आरसी जारी कर दी गई है। डीएम के अनुमोदन के बाद सहकारी समिति के सचिव ने मिल के अध्याशी को नामजद कर आवश्यक वस्तु अधिनियम, धोखाधड़ी और षड्यंत्र रचने की धारा में मुकदमा दर्ज कराया है।
मलकपुर चीनी मिल पर पेराई सत्र 2017-18 के करीब 235 करोड़ रुपये बकाया है। हाईकोर्ट ने भुगतान नहीं किए जाने पर डीएम और डीसीओ को 28 फरवरी को तलब किया। गन्ना आयुक्त संजय भूसरेड्डी ने गन्ने का बकाया भुगतान नहीं चुकाने पर चीनी मिल का वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी कर दी है।
उधर, सहकारी गन्ना विकास समिति मलकपुर के सचिव ओमप्रकाश ने चीनी मिल के अध्याशी राज कुमार शर्मा के खिलाफ बड़ौत कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। एसपी जयप्रकाश ने बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, गन्ना अधिनियम, भारतीय दंड संहिता की धारा 418, 420 और 120बी में मुकदमा दर्ज किया गया है।
सिर्फ 17 करोड़ का भुगतान, उसमें भी तकरार
बागपत। पिछले पेराई सत्र के भुगतान के लिए चीनी मिल ने हाईकोर्ट में शेड्यूल बनाकर हलफनामा दाखिल किया। चीनी मिल वर्तमान पेराई सत्र के प्रोडक्शन से पिछले सत्र का भुगतान कर रही है, लेकिन नए सत्र का भुगतान नहीं करने पर भी हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है।
प्रत्येक 14 दिन बाद भुगतान का नियम है, लेकिन नए पेराई सत्र के सिर्फ 17 करोड़ रुपये दिए हैं। पहले चीनी मिल को 31 मार्च तक पेराई सत्र 2016-17 का संपूर्ण भुगतान करना था, लेकिन दिसंबर माह में चीनी मिल ने 40 करोड़ के बजाए 23 करोड़ का भुगतान किया।
मिल का तर्क था कि उनके खाते से प्रशासन ने पिछले सत्र के बजाए 17 करोड़ रुपये से वर्तमान पेराई सत्र का भुगतान करा दिया। इस वजह से वह संपूर्ण भुगतान नहीं कर सके। ऐसे में यह 17 करोड़ देने के लिए मिल को 15 अप्रैल तक का समय दे दिया गया है।
दो हजार किसान और 118 करोड़ बकाया
बागपत। चीनी मिल क्षेत्र के करीब दो हजार किसान ऐसे हैं, जिन्हें पिछले पेराई सत्र का एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। जबकि चीनी मिल पर 15 फरवरी तक ही पिछले सत्र के 118 करोड़ रुपये बकाया थे। जबकि 22 फरवरी तक वर्तमान सत्र के करीब 235 करोड़ बकाया है। तब गन्ना विभाग और जिला प्रशासन हरकत में आया।