कोतवाली पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में अमित उर्फ भूरा ने कहा कि यदि वह पुलिस अभिरक्षा से न भागता तो चीनू पंडित उसकी जेल में ही हत्या करा देता। चीनू कई बार उसे मारने का प्रयास कर चुका था। लेकिन हर बार नाकाम हो जाता था।
पुलिस के मुताबिक अमित ने बताया कि चीनू पंडित, सुनील राठी को मारना चाहता था। लेकिन उसका नेटवर्क बड़ा होने के कारण वह अपने इरादे में कामयाब नहीं हुआ। उसके बाद चीनू ने उसे मारने का प्लान बनाया। उसने कई बार उसे मारने की कोशिश की थी। दिल्ली कोर्ट में पेशी पर जाते समय एक दिन चीनू ने रेलवे स्टेशन पर उसे मारने की कोशिश की थी। लेकिन उसने चीनू को पहचान लिया था।
वे रास्ता बदल कर वहां से निकल गए थे। उसकी हत्या न हो जाए, इसलिए उसके साथी सुनील राठी ने उसे जेल से बाहर निकालने का प्लान बनाया। सुनील ने तीस हजार कोर्ट में पेशी के दौरान नीरज बवाना से बातचीत की। नीरज ने अपने साथी प्रमोद हिरणकी, सचिन खोखर व उसके भाई रोबिन खोखर समेत कई लोगों के साथ मिलकर अपने मामा पूर्व विधायक रामवीर शौकीन के कार्यालय और फैक्ट्री में उसे छुड़ाने का प्लान तैयार किया। इसमें पूर्व विधायक भी शामिल रहे थे। प्लान के अनुसार उन्होंने उसे छुड़वाया।
कई जगह पर काटी फरारी
बागपत। पुलिस के मुताबिक देहरादून पुलिस कस्टडी से भागने के बाद अमित अपने साथी सचिन और नवीन के साथ सबसे पहले मुरथल गया। उसके बाद वे पूर्व अमित और सचिन विधायक रामवीर शौकीन की फैक्ट्री में गए। वहां पांचों करीब एक सप्ताह रहे। उसके बाद वे दोनों राजस्थान, मध्य प्रदेश, उज्जैन और पंजाब में जाकर छुपे थे।
कैमरे से पता चल जाता था पुलिस दबिश का पुलिस के मुताबिक अमित ने बताया कि पुलिस ने कई बार फैक्ट्री में दबिश दी। लेकिन फैक्ट्री में लगे कैमरे से पुलिस का पता चल जाता था। उसके बाद वे वहां से भाग जाते थे।
झगड़ा होने से पकड़ा गया भूरा
बागपत। पुलिस के मुताबिक भूरा ने बताया कि वे पंजाब के पटियाला में किराए के मकान में रह रहे थे। इसी दौरान उसका एक युवक से झगड़ा हो गया था। वहां पर पुलिस पहुंच गई थी। पुलिस उसे पकड़कर थाना ले गई। पूछताछ करने पर उसने अपना नाम नितिन बताया। उसके पास पुलिस ने कई आईडी और स्कार्पियों की चाबी मिली। पुलिस उनके बारे में पूछा कर उसके कमरे पर गए तो वहां पर सचिन मिला। उसका नाम उसने रजनीश बताया था। शक होने पर पुलिस ने उनसे सघन पूछताछ की तो राज खुल गया। इस दौरान सीआईए के एक इंस्पेक्टर ने उसे पहचान भी लिया था।
रोबिन देता था हर मामले की जानकारी
बागपत। अमित ने बताया कि फरारी के समय रोबिन खोखर उसे हर जानकारी देता था। रोबिन ही फरारी के समय उसे टटीरी स्टेशन पर सबसे पहले मिला था।
देहरादून पुलिस को दी थी हमले की जानकारी
बागपत। पुलिस सूत्रों के मुताबिक अमित ने बताया कि उसने देहरादून पुलिस को जानकारी दे दी थी कि उस पर कभी भी हमला हो सकता है। जो लोग स्कॉर्पियो में सवार होकर गुजर रहे हैं। वे संदिग्ध प्रतीत हो रहे हैं। जबकि अमित को पता था कि ये लोग ही उसे पुलिस कस्टडी से छुड़ाएंगे।