कार्यक्रम को संबोधित करते बिहार के राज्यपाल।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
बिहार के राज्यपाल बनाए जाने के बाद पहली बार अपने पैतृक गांव हिसावदा पहुंचे सत्यपाल मलिक का जोरदार अभिनंदन किया गया। यादों में खोए मलिक ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने उन्हें अपनी औलाद से बढ़कर माना। मलिक ने कहा कि मेरी दो मां थीं, एक जन्म देने वाली और दूसरी मेरठ कॉलेज। युवाओं से आह्वान किया कि लक्ष्य हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करें, सफलता जरूर मिलेगी।
शनिवार को राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने सबसे पहले अपने गांव के बाहरी छोर स्थित कुल देवता की पूजा-अर्चना की। इसके बाद गांव में पहुंचे। ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
पुराने संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल की उम्र में पिता का निधन हो गया था, ऐसे में उनकी मां ने हौसला दिया। हिसावदा ने कभी महसूस नहीं होने दिया कि वह बिन बाप के बेटे हैं। मां ने मेरठ कॉलेज पढ़ने के लिए भेजा।
चार साल की छात्र राजनीति से उन्होंने इतना हासिल किया, जितना कोई 60 साल में भी हासिल नहीं कर पाता। मलिक ने कहा कि उनका दायित्व था कि राज्यपाल बनने के बाद सबसे पहले अपनी मातृ भूमि और मेरठ कालेज, जिसकी वजह से यहां पर पर पहुंचे है उनको सिर झुकाने पहुंचा जाए। मेरठ कालेज पहले जा चुका था। इसलिए अब गांव आए हैं। वहीं, गांव से लौटने से पहले प्राचीन शिव मंदिर में पूजा अर्चना भी की। आसपास के गांव के लोग मौजूद रहे।
चरण सिंह की यादों में खोए रहे मलिक
बागपत। बिहार के राज्यपाल मलिक हिसावदा में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की यादों में खोए रहे। राज्यपाल ने बताया कि बड़े चौधरी ने उनसे कहा था-मेरी उम्र देखो, 31 एमएलए छोड़कर चले गए हैं। अब पार्टी को संभालो। आखिरी वक्त में भी मेरे बारे में अच्छा ही कहकर गए। इसके अलावा मलिक ने बताया कि चौधरी चरण सिंह ने अपने एक परिचित अंग्रेजी किताब के लेखक के सवाल पर कहा था कि उनके और बड़े चौधरी के बीच कुछ लोगों ने गलतफहमियां पैदा की थीं। इसके चलते ही वे चीफ मिनिस्टर नहीं हो पाए थे। ब्यूरो