बागपत में पुलिस की नाक में दम कर देने वाले हिस्ट्रीशीटर तैमूर को ठिकाने लगाने वाले मुसाहिद को मारने में उसका ही दोस्त खालिद उर्फ सोनू दुश्मन बना है। सोनू ने ही अपने दोस्त से विश्वासघात कर तैमूर गैंग के साथ मिलकर उसका बेरहमी से कत्ल कर डाला।
यह पहली घटना नहीं है जब दोस्त ने ही दगाबाजी की हो। बागपत के ग्राम शेरपुर लुहारा में दो माह पूर्व विकास को उसके ही दोस्त ने डेढ़ लाख रुपये लेकर हिस्ट्रीशीटर अमरपाल को सौंपा था। बाद में अमरपाल ने अपने साथियों के साथ मिलकर विकास और उसके भाई पप्पू की गर्दन काटकर लाश को यमुना में बहा दिया था। उनकी गर्दनों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
मुसाहिद के मामले में भी यही हुआ। मुसाहिद ने वर्ष 2011 में जिस समय हिस्ट्रीशीटर तैमूर की हत्या की थी। उस समय तैमूर पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित था। अलग-अलग थानों में उस पर लूट, डकैती, हमले के 46 मुकदमे दर्ज थे। उसने पुलिस की नाक में दम कर रखा था।
पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पा रही थी। मुसाहिद ने खेत से ट्रैक्टर-ट्राली में गन्ना लाते समय गांव में गोलियों से भूनकर तैमूर की हत्या की थी। तैमूर गैंग के साथी तभी से ही मुसाहिद की हत्या करने की फिराक में थे, लेकिन वे सफल नहीं हो पा रहे थे। उन्होंने मुसाहिद के ही दोस्त सोनू को पहले अपने पक्ष में किया। उसके माध्यम से ही उन्होंने मुसाहिद की हत्या की।
ऐलान करके की थी तैमूर की हत्या
बागपत। मुसाहिद के परिजनों का कहना है कि तैमूर के आतंक से गांव की महिलाएं और लड़कियां परेशान थीं। वह उनके साथ छेड़छाड़, अश्लील हरकतें करता था। इसका मुसाहिद ने विरोध किया था। इस बात को लेकर उसके बीच कहासुनी हो गई थी। बाद में तैमूर ने मुसाहिद पक्ष की एक महिला के साथ छेड़छाड़ कर दी थी। इसी बात पर मुसाहिद ने ऐलान करके तैमूर को मारने की धमकी दे दी थी। उसी के अनुसार उसने घटना को अंजाम दिया था।
ग्रामीणों ने दिया था मुसाहिद को इनाम
बागपत। लोगों का कहना है कि तैमूर की हत्या करने के बाद गांव के लोगों ने लाखों रुपये इकट्ठे कर मुसाहिद को इनाम दिया था।
मौसेरा भाई है ग्राम प्रधान
बागपत। परिजनों ने बताया कि मुसाहिद का मौसेरा भाई सरफराज गांव नंगला का प्रधान है। पुलिस ने नौशाद नाम का जो युवक पकड़ रखा है। वह सरफराज का भाई है।