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हत्यारे का सुराग नहीं, एसपी ने गठित की दो टीमें

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हत्यारे का सुराग नहीं, एसपी ने गठित की दो टीमें
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बागपत। मनोरोगी युवक राम रहीम हत्याकांड में पुलिस 36 घंटे बाद भी हत्यारे का सुराग नहीं लगा पाई है। कईं संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। वहीं मृतक राम रहीम के शव का हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया। उसकी अंतिम यात्रा में हिंदू व मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग शामिल हुए।
बुधवार रात पुराना कस्बा पुलिस चौकी के सामने मनोरोगी युवक राम रहीम की गला दबाकर और सिर में पत्थर मारकर हत्या कर दी गई थी। यह पूरी घटना चौकी के पास हाजी उस्मान के मकान के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। पुलिस पहले मामले को दुर्घटना मान रही थी, लेकिन सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद मामला हत्या का निकला। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और दुर्घटना को हत्या की धाराओं में तरमीम कर कार्रवाई शुरू कर दी। इस घटना को 36 घंटे बीत चुके है, लेकिन पुलिस अभी तक हत्यारे का पता नहीं लगा पाई है।
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एसपी जयप्रकाश ने हत्या के खुलासे के लिए क्राइम ब्रांच व कोतवाली पुलिस की दो टीमें बनाई है। दोनों टीमें सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के आधार पर हत्यारे की पहचान कराने में लगी हैं। पुलिस कुछ संदिग्ध युवकों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए युवकों के परिजनों ने बृहस्पतिवार की रात कोतवाली पहुंचकर जमकर हंगामा किया। शुक्रवार की सुबह भी युवकों के परिजन कोतवाली पर डेरा जमा हुए है। पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि पूछताछ करने के बाद युवकों को छोड़ दिया जाएगा।
शुक्रवार को पोस्टमार्टम होने के बाद मनोरोगी युवक राम रहीम के शव को हिंदू समाज के लोगों को सौंप दिया गया। लोगों ने यमुना नदी किनारे हिंदू रीति रिवाज से शव का अंतिम संस्कार किया। चिता को मुखाग्नि लोकतंत्र सेनानी सुखवीर सिंह ने दी। राम रहीम की अंतिम शव यात्रा में हिंदू व मुस्लिम समाज के लोग शामिल हुए। इस घटना से हर कोई दुखी है। हत्याकांड का खुलासा न होने से लोगों में पुलिस के प्रति आक्रोश पनप रहा है। लोगों ने शीघ्र हत्यारे को गिरफ्तार करने की मांग की है। इस संबधं में कोतवाली प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि हत्यारे की तलाश में क्राइम ब्रांच व पुलिस की दो टीमें लगी हैैं। शीघ्र ही हत्यारे को पकड़ लिया जाएगा।
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ऐसे बागपत का हो गया राम रहीम
पुलिस जांच शुरू हुई तो कई तथ्य सामने आए। सबसे पहले सवाल था कि आखिर राम रहीम कौन था, कहां का रहने वाला था और बागपत तक कैसे पहुंचा। पुलिस ने जांच की तो मालूम पड़ा कि राम रहीम को 15 साल पहले अज्ञात लोग बागपत में पेट्रोल पंप के पास कार से फेंककर भाग गए थे। उस समय उसकी उम्र महज 10-12 साल थी। वह यहीं पर ही बड़ा हुआ। लोगों को उससे बहुत लगाव हो गया था। हिंदू व मुस्लिम समाज के लोगों ने मिलकर उसका नाम राम रहीम रख दिया। राम रहीम की कई साल पहले मांझे से गर्दन कटने से आवाज चली गई थी। उसका शहर के लोगों ने मिलकर इलाज कराया था।
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राम रहीम की होगी तेरहवीं
पुराना कस्बा निवासी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि राम रहीम के शव का यमुना किनारे अंतिम संस्कार किया गया है। तीन दिन बाद हिंदू रीति रिवाज से उसकी अस्थियों का यमुना में विसर्जन किया जाएगा। समाज के लोग मिलकर उसकी तेरहवीं भी करेंगे और ब्रह्म भोज कराया जाएगा।
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