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गड्ढ़े से मौत पर दर्ज किया जाए हत्या का मुकदमा

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बागपत। गड्ढों की वजह से होने वाली मौत पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से आम जन को बेहतर परिणाम की उम्मीद बंधी है। लोगों ने कहा जिस सड़क पर गड्ढे की वजह से हादसा हो, उसका निर्माण करने वाले विभाग या कंपनी पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए, क्योंकि सड़कों की सही देखरेख न होने के कारण ही हादसे होते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट की ओर से सड़क पर गड्ढ़ों की वजह से हादसों पर मुआवजा दिए जाने की बात कहे जाने पर लोगों ने संतोष जाहिर किया। लोगों का कहना है कि सिर्फ मुआवजे से गड्ढों के प्रति अधिकारियों, ठेकेदार कंपनी की निष्क्रियता दूर नहीं हो सकेगी। गौरीपुर निवासी ओमवीर का कहना है कि अधिकारी लापरवाही करते हैं। सरकार की योजनाओं को धरातल पर नहीं उतारते। जो कंपनी निर्माण करती है, उसे ही मरम्मत की जिम्मेदारी रहती है, लेकिन समय पर कार्य नहीं किया जाता। इस वजह से जिम्मेदार लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हो।
निवाड़ा गांव निवासी इफ्तखार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का रवैया सही है। मुआवजा भी मिले और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। आखिरकार सड़क पर जो गड्ढे बनते हैं, उन्हें भरने की जिम्मेदारी भी तो तय होनी चाहिए। क्योंकि सड़क पर गड्ढे होने के कारण आए दिन हादसे होते हैं।
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सिसाना निवासी संजीव चौहान का कहना है कि जब तक अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, हादसे रुकने वाले नहीं है। सख्त कानून बनें। सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्देश दिए हैं, उनसे आम आदमी को उम्मीद बंधना लाजिमी है।


आम आदमी होते हैं शिकार
बागपत। नया गांव निवासी सतपाल सिंह का कहना है कि सड़क पर गड्ढों की वजह से हादसे का शिकार बाइक सवार होते हैं। उच्च वर्ग के लोग तो कारों में चलते हैं। मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग के लोग ही साइकिल और बाइक पर चलते हैं, यही शिकार बनते हैं। इस वजह से सुप्रीम कोर्ट का रवैया बेहद अच्छा है।

कहां-कहां होते हैं हादसे
बागपत। जिले में दिल्ली-सहारनपुर मार्ग पर गौरीपुर और सरूरपुर के निकट सबसे अधिक हादसे होते हैं। मेरठ मार्ग पर गड्ढों की वजह से अग्रवाल मंडी टटीरी और बालैनी के निकट सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। बुढ़ाना मार्ग पर बिजरौल और बामनौली के बीच हादसों की संख्या अधिक है। रमाला और किशनपुर बराल के निकट भी हादसे होते हैं।


क्या कहते हैं कानून के जानकार
जिला बार संघ के पूर्व अध्यक्ष जयवीर सिंह तोमर का कहना है कि गड्ढों से होने वाली मौत पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे की बात सही कही है, अन्य प्रावधान भी किए जाए। नियम सख्त होंगे तो सिस्टम में सुधार होगा।


सिस्टम नहीं जागा, खुद भरे गड्ढे
बागपत। गौरीपुर गांव के निकट सड़क पर गड्ढे की वजह से कई हादसे हो चुके हैं। ग्रामीणों ने शनिवार को खुद ही फावड़े से गड्ढे भरने का काम किया। ग्रामीण सतवीर सिंह का कहना है कि प्रशासन की इंतजार कब तक करते, आखिरकार खुद ही गड्ढे भरने का काम करना पड़ा।
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