बागपत। पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद पुलिस की पूरी कहानी उलझी हुई है। पुलिस के पास वारदात का एक भी प्रत्यक्षदर्शी नहीं है। खुद जेलर ने भी सिर्फ गोलियों की आवाज सुनी थी। राठी के खिलाफ गवाही देने की हिम्मत किसी बंदी में नहीं है। यही वजह है कि लापरवाही में अफसरों पर तो कार्रवाई होनी शुरू हो गई है, लेकिन चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी सुनील राठी को सजा कराना आसान नहीं होगा। इस वारदात का प्रत्यक्षदर्शी मिलना आसान नहीं होगा। पिस्टल की फोरेंसिक रिपोर्ट ने पुलिस की मुश्किल बढ़ा दी है। इससे पहले बजरंगी जिस विक्की सुन्हैडा के साथ बैरक में रुका था, वह खुद कह चुका है कि उसने तो शौचालय के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनी थी। पुलिस के सामने भले ही राठी ने वारदात कुबूल कर ली हो, लेकिन कानूनी लड़ाई में वह कभी इसे स्वीकार नहीं करेगा। जेल में पिस्टल जिस भी तरह पहुंची हो, इसमें अफसरों पर ही कार्रवाई होनी है। पुलिस के लिए घटना के तार जोड़ना आसान काम नहीं है।
वारदात के सिरे नहीं जोड़ पा रही है पुलिस
बागपत। जेल अधिकारी सिर्फ यह जांच कर रहे हैं कि जेल में पिस्टल कैसे पहुंचा। एडीजी जेल चंद्रप्रकाश के सामने भी राठी ने यही दोहराया कि पिस्टल उसका नहीं था। बजरंगी ने सुपारी को लेकर कहासुनी के बाद उसके ऊपर पिस्टल तान दी। इसके बाद उसने अपने बचाव में हत्या की। उधर, पुलिस यह सिरे जोड़ने का प्रयास कर रही है कि आखिर क्यों हत्या की गई और जेल में पिस्टल कैसे पहुंचा। अपराध जगत के कौन चेहरे इसमें शामिल हैं।