बागपत। प्रदेश के माफियाओं की सूची में शामिल कुख्यात अमरपाल उर्फ कालू का आपराधिक इतिहास 23 साल पुराना है। गवाहों में उसका खौफ इस कदर था कि कचहरी में गवाही देने से पीछे हट जाते थे, इसलिए 10 मुकदमों में दोषमुक्त हो चुका है। दोहरे हत्याकांड में कड़ी पैरवी होने पर पहली बार अमरपाल लुहारा पर दोषसिद्ध हुआ। उधर, दोहरे हत्याकांड के पीड़ित ने हत्यारों को फांसी की सजा की मांग की।
लुहारा गांव के माफिया अमरपाल उर्फ कालू के खिलाफ सबसे पहला मुकदमा साजिश रचकर हत्या करने का छपरौली थाने में दर्ज हुआ, इसमें पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर तमंचा भी बरामद किया। इसके बाद शामली के झिंझाना थाने में जानलेवा हमला करने का मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद अमरपाल ने बागपत के अलावा मेरठ, शामली समेत अन्य जनपदों में हत्याओं, जानलेवा हमला, अपहरण, रंगदारी मांगने, लूटपाट समेत 44 घटनाओं को अंजाम दिया। दो भाइयों की हत्या में जेल जाने के बाद सुपारी लेकर शूटरों से वर्ष 2016 में खिंदौड़ा गांव के प्राथमिक विद्यालय में हेड मास्टर सत्यपाल शर्मा की गोली मारकर हत्या करा दी थी। इसके बाद जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद वर्ष 2022 में लुहारी गांव के जितेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी। इस हत्याकांड में 50 हजार रुपये का इनाम घोषित होने के बाद नोएड़ा में आत्मसमर्पण कर दिया था। वादी तिरसपाल ने कहा कि उसको न्यायालय पर भरोसा है और उनके भाई को मारने वाले को कड़ी सजा मिलेगी। इनको भी न्यायालय से ऐसी ही मौत की सजा मिले, जैसे इन्होंने मेरे भाइयों को मारा था।
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