बड़ौत। डीजल के बढ़े दामों से किसानों पर भी आफत आ गई है। डीजल के दाम में लगातार बढ़ोत्तरी से ट्रैक्टर संचालकों ने खेत की जुताई 50 रुपये बीघा मंहगी कर दी है। ट्यूबवेल संचालक भी सिंचाई का दाम 50 रुपये प्रति घंटा बढ़ाने की तैयारी में है। किसान को एक बीघा खेत की जुताई का अब 250 से 300 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पडे़ंगे। इसमें सिंचाई की बढ़ी दर भी जोड़ ले तो यह खर्च 500 से अधिक बैठेगा।
खरीफ फसल का सीजन 20 जून से शुरू हो जाता है। इस सीजन में धान, तिल, उड़द, मूंग, बाजरा, मक्का बोई जाती है। पहली बारिश के बाद जुताई होने लगती है। बारिश देर से होती है तो ट्यूबवेल से सिंचाई कर खेत जोते जाते है। 22 दिनों से डीजल के दाम में लगातार बढ़ोत्तरी किसानों को भारी पड़ने लगी है। वैसे ही पहले से किसान बकाया गन्ना भुगतान की मार झेल रहा है। किसान सुधीर बताते है कि फसल बोने से पहले खेत की कम से कम चार बार और अधिकतम छह बार जुताई करानी पड़ती है। ट्रैक्टर संचालकों ने गत सीजन में 250 रुपये प्रति बीघा की दर से जुताई ली थी। इस बार जुताई 300 रुपये प्रति बीघा है। इससे औसत पांच बार जोताई में 1500 रुपये खर्च आएगा, जो पिछली बार से 250 रुपये ज्यादा है। किसानों का कहना है कि सरकार ने आर्थिक मदद के तौर पर जो राशि दी है, वह डीजल के बढ़े दामों की वजह से वापस सरकारी खजाने में पहुंच रही है।
क्या कहते है किसान
किसान जसवीर का कहना है कि मेरे पास 20 बीघे खेत है। लगभग 30000 रुपये खर्च सिर्फ जुताई मेें खर्च होंगे। इसमें 5000 रुपये अतिरिक्त देने पडे़ंगे। डीजल की वजह से इस बार फसल की लागत बढ़ रही है। उधार लेकर जैसे-तैसे फसल बोने की तैयारी है। वैसे ही बकाया गन्ना भुगतान की मार किसान झेल रहा है।
किसान मुनिश व देवराज का कहना है कि अभी तो सिर्फ जुताई में अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ रहा है। समय पर बारिश न हुई तो ट्यूबवेल से सिंचाई करवानी पड़ेगी। डीजल के बढ़े दाम से ट्यूबवेल संचालन सिंचाई की दर 50 रुपये प्रति घंटा तक बढ़ाने की तैयारी में है। एक बीघा खेत में फसल तैयार होने तक कम से कम पांच बार पानी लगाना पड़ता है।