तेज गर्मी और गर्म हवाओं से हर कोई परेशान है। ऐसे मौसम में अगर किसी स्कूल में बिजली न हो तो वहां पढ़ने वाले बच्चों का हाल क्या होगा, यह सोच सकते हैं। यही हाल शिकोहपुर गांव के संविलियन विद्यालय का। जहां पर ऊर्जा निगम की लापरवाही से बच्चे पिछले 15 दिनों से पसीना-पसीना हो पढ़ाई कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने भी खानापूर्ति के लिए मात्र मौखिक शिकायत कर अपना पीछा छुड़ा लिया। अब बच्चों के अभिभावकों में आक्रोश पनपता जा रहा है।
सबसे बुरी हालत छोटे बच्चों की है। यहां पर इस समय प्राइमरी में 131 और जूनियर में 81 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। पिछले 15 दिनों से बिजली न होने के कारण गर्मी में बच्चों का क्लास में बैठना मुश्किल हो रहा है। बच्चे किताब और कॉपी को ही पंखे की तरह प्रयोग कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में बच्चे पढ़ाई क्या करेंगे, यह सोचने वाली बात है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक राकेश शर्मा ने खानापूर्ति के लिए ऊर्जा निगम को मौखिक शिकायत की है।
वहीं ऊर्जा निगम के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें लिखित में शिकायत नहीं मिली है। बिना लिखित शिकायत कैसे समस्या का समाधान करें। यानी ऊर्जा निगम और प्रधानाध्यापक की लापरवाही का खामियाजा मासूमों को उठना पड़ रहा है। इससे अभिभावकों में रोष पनपता जा रहा है।
उन्होंने समस्या का शीघ्र समाधान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। इस संबंध में प्रधानाध्यापक का कहना है कि यह गांव की राजनीति है। बिजली समस्या के निस्तारण को लेकर मौखिक शिकायत की जा चुकी है। उधर, जब इस संबंध मेें बीएसए कीर्ति और एबीएसए अजय कुमार से फोन पर बातचीत करने की कोशिश की तो किसी ने भी फोन उठाना उचित नहीं समझा।
ऐसे अधिकारियों के खिलाफ होनी चाहिए कार्रवाई
सामाजिक कार्यकर्ता मनु तिवारी, बबलू, सोनू का कहना है कि भीषण गर्मी में बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मनामनी पर उतारू है, ऐसे में डीएम को हस्तक्षेप कर कार्रवाई करनी चाहिए।