सूर्योपासना का महापर्व बुधवार की सुबह उदय होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही संपन हो गया। महिलाओं ने यमुना के ठंडे पानी में खड़े होकर सूर्य की पहली किरण जमीन पर पड़ते ही अर्घ्य दिया।
इस दौरान जमकर आतिशबाजी की गई। यमुना घाट पर मेला लगा। नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ छठ पूजा पर्व अंतिम दिन बुधवार को पूरे रंग में नजर आया। सुबह ही लोग यमुना घाट पर पहुंच गए और पूजा शुरू कर दी। यमुना के घाट पर मेला लगा रहा। पूरा क्षेत्र भक्ति गीतों से भक्तिमय हो गया।
पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने छठ देवी को सजाया। बांस से बने डेंगची और सूप में नारियल, मेवा, हल्दी, ठेकुआ और अन्य पूजा अर्चना की। गन्ने का मंडप बनाया और दीपक जलाकर यमुना के जल में प्रवाहित किया।
लोग कलश में दूध और जल लेकर यमुना में खड़े हो गए और सूर्यदेव की उपासना शुरू कर दी। सूर्य की पहली किरण जमीन पर पड़ते ही लोगों ने सूर्य को अर्घ्य दिया।
महिलाओं ने भी यमुना के शीतल जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे तक रखे निर्जल उपवास को पूरा किया, और छठ मैया की पूजा अर्चना की। पूजा अर्चना के बाद घर पहुंचकर महिलाओं ने घर में पकवान बनाए और भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया।