बागपत में कोहरे के बीच स्कूल जाते बच्चें
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बागपत में मौसम का बदला मिजाज सेहत पर भारी पड़ रहा है। लोग वायरल, बदन दर्द, सर्दी, जुकाम, खांसी की चपेट में आकर बीमार पड़ रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या में बढ़ रही है।
खासकर बच्चे बुखार और विंटर डायरिया की चपेट मेें आ रहे हैं। बच्चों की देखभाल में जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. मुकेश उपाध्याय के मुताबिक बच्चों के आंत की क्षमता वैसे भी कमजोर होती है। इनमें लूज मोशन का खतरा हमेशा बना रहता है। वहीं शहद, घुट्टी और बोतल के दूध के सेवन से बच्चों की आंत मेें संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम में अधिक लूज मोशन की शिकायत बच्चें को विंटर डायरिया की चपेट में ला सकता है। छह माह तक कराएं सिर्फ स्तनपान।
वहीं बड़ौत मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अमित खोखर के अनुसार ठंड के मौसम मेें बच्चों में सर्दी, जुकाम, बुखार, विंटर डायरिया, निमोनिया की समस्या आम बात है। लिहाजा हमें बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सचेत रहने की जरूरत है। खासकर छह माह तक के बच्चों की सेहत के प्रति। छह माह तक के बच्चों को बाहरी पेय पदार्थ देने के बजाय मां के स्तनपान उन्हें मौसमी बीमारियों से बचा सकता है। मां के दूध से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती ही है। इससे आंत में संक्रमण की गुंजाइश भी कम रहती है।