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Baghpat News: सिद्ध होने से पहले ही कचहरी से भाग गया सेवानिवृत्त दरोगा

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- अपर जिला एवं सत्र न्यायालय विशेष एससीएसटी एक्ट में हुई सुनवाई, शनिवार का दिन सजा पर सुनवाई के लिए नियत किया
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- खेकड़ा कोतवाली में दर्ज डोडा बरामदगी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दरोगा अमन सिंह और एचसीपी के खिलाफ दर्ज हुई थी प्राथमिकी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष एससीएसटी पवन कुमार राय ने फर्जी साक्ष्य तैयार करने, युवक को अवैध रूप से हिरासत में रखने, एससीएसटी एक्ट के मामले में सेवानिवृत्त दरोगा अमन सिंह निवासी बुलंदशहर पर दोष सिद्ध कर दिया। दूसरे आरोपी सेवानिवृत्त एसआई बिजेंद्र सिंह को दोषमुक्त करार दिया। न्यायालय के बाहर से सेवानिवृत्त एसआई अमन सिंह दोष सिद्ध होने से पहले वहां से भाग गया। न्यायालय ने उसके गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2018 में खेकड़ा कोतवाली में तत्कालीन दरोगा अमन सिंह और एचसीपी बिजेंद्र के खिलाफ एसएसआई रजनीश कुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में खेकड़ा कोतवाली में क्षेत्र के एक गांव निवासी रवि के खिलाफ दर्ज ढाई किलो डोडा बरामदगी के मामले की जांच आईजी ने क्राइम ब्रांच मेरठ से कराई, जिसमें रवि की गिरफ्तारी और बरामदगी फर्जी मिली। साथ ही तत्कालीन एसआई अमन सिंह और एचसीपी बिजेंद्र सिंह को रवि को अवैध हिरासत में रखने, जेल भेजने के लिए फर्जी साक्ष्य तैयार करने, एनडीपीएस एक्ट, एससीएसटी एक्ट के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की।
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इसके बाद विवेचना में पुलिस ने दोनों को दोषी मानते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय विशेष एससीएसटी में हुई। इसमें आरोपी दरोगा अमन सिंह और बिजेंद्र सिंह दरोगा सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बृहस्पतिवार को मुकदमे की सुनवाई के लिए सेवानिवृत्त दरोगा अमन सिंह और बिजेंद्र सिंह पेश हुए। दोपहर बाद सुनवाई शुरू होने पर भी दोनों सेवानिवृत्त दरोगा न्यायालय के बाहर रहे, लेकिन न्यायाधीश पवन कुमार राय का आदेश जारी होने से पहले ही सेवानिवृत्त एसआई अमन सिंह वहां से भाग गए।
न्यायाधीश पवन कुमार राय ने एनडीपीएस एक्ट की धारा में दोनों को बरी कर दिया। वहीं गलत साक्ष्य तैयार करने, युवक को अवैध हिरासत में रखने, एससीएसटी एक्ट में सेवानिवृत्त दरोगा अमन सिंह पर दोषसिद्ध और बिजेंद्र सिंह को दोषमुक्त करार दिया। इस मामले में न्यायाधीश ने अमन सिंह के गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए और सजा पर सुनवाई के लिए शनिवार का दिन नियत किया।
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यह है पूरा मामला
खेकड़ा क्षेत्र के एक गांव की अनुसूचित जाति की युवती ने वर्ष 2015 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उसके भाई का गांव में रहने वाले दूसरी बिरादरी की युवती से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। दोनों घर से चले गए थे। मेरठ पुलिस ने दोनों को बरामद किया। युवती के पिता से मिलीभगत कर पुलिस ने फर्जी तरीके से उसके भाई से ढाई किलो डोडा बरामद कर जेल भेजा। इसके बाद युवती की बिरादरी के लोगों ने पंचायत करके उसे और उसकी बहन को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाने का फरमान सुनाया था। डोडा बरामदगी के फर्जी मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2018 में दरोगा समेत दो के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
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