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नदियों के पानी की जांच रिपोर्ट में ही अंतर

Sat, 07 Nov 2015 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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बागपत में नदियों के किनारे बसे गांवों में पानी के प्रदूषण को लेकर स्थानीय जल निगम और केंद्रीय जल निगम की रिपोर्ट में पूरी तरह से विरोधाभास हो गया है। स्थानीय जल निगम की जांच रिपोर्ट में पानी पूरी तरह से शुद्ध एवं पीने योग्य बताया गया है, जबकि 4 नवंबर को आई केंद्रीय टीम ने पानी को पीने तो क्या हाथ धोने लायक भी नहीं बताया।
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क्षेत्र के लोग संशय में हैं कि किसकी रिपोर्ट को सही माने और किसकी रिपोर्ट को गलत। मगर, क्षेत्र के हालातों को देखकर यह तो स्पष्ट है कि पानी पीने लायक बिल्कुल नहीं हैं। केंद्रीय जल निगम की टीम के सर्वे के अनुसार यहां का पानी इतना खतरनाक हो चुका है कि पानी पीने वाला कैंसर एवं अन्य घातक बीमारियों की चपेट में आने से नहीं बच सकता।

सर्वे के अनुसार सूजती थल, मौजिजाबाद नांगल गांव में हैंडपंपों के पानी का सर्वे किया तो पानी इतना जहरीला मिला कि वह पीने के तो क्या छूने के लायक भी नहीं है। हिंडन नदी के किनारे बसे गांव सरोरा, तमेलागढ़ी, झूंडपुर, मिलाना, खपराना, रहतना, शाहपुर बाणगंगा, बरनावा, शेखपुरा, चिरचिटा, गल्हैता, पुरा महादेव एवं कृष्णा नदी के किनारे बसे गांव बूढ़पुर, सूजती, खड़ाना, गांगनौली, इब्राहिमपुर माजरा, थल, मौजिजाबाद नांगल, कंडेरा, बामनौली, रंछाड़, इदरीशपुर, मांगरौली, दादरी, चौगामा क्षेत्र के दाहा, निरपुड़ा एवं टीकरी गांवों में लगे हैंडपंप भी जहरीला पानी दे रहे हैं।
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विभाग के अधिकारी राजवीर सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र का पानी प्रभावित हो चुका है। यहां गहराई में बोरिंग कर ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सकता है। जबकि स्थानीय जल निगम की इकाई द्वारा कराई गई हैंडपंपों की जांच में नदियों के किनारे स्थित गांवों का पानी पूरी तरह से शुद्ध और पीने योग्य पाया गया।

जिले के अलग-अलग गांवों से 50 से अधिक सेंपल लेकर जल निगम की गाजियाबाद स्थित प्रयोगशाला में भेजे गए, जहां से रिपोर्ट बिल्कुल ओके आई। जल निगम के अधिकारियों ने रिपोर्ट दी कि पानी में कैंसर जैसी बीमारी पैदा करने वाले कोई तत्व मौजूद नहीं हैं। फिर भी जल निगम ने 10 हैंडपंपों को रेड पेंट कर उनके पानी को सिर्फ कपड़े धोने एवं पशुओं को नहलाने में प्रयोग करने के लिए कहा।

अब अंतर आ सकता है पानी की जांच में
जल निगम के प्रभारी अधिकारी ओपी सिंह का कहना है कि जल निगम ने 50 से अधिक नमूने जांच के लिए जिल निगम की गाजियाबाद स्थित प्रयोगशाला में भेजे थे। जांच में पानी पीने योग्य पाया गया। लेकिन हो सकता है कि अब पानी में कुछ और अंतर आ गया हो और पानी खराब हो गया हो। वह फिर से हैंडपंपों के पानी की जांच कराएंगे, ताकि कितना अंतर आ गया है, यह पता चल सके।

दोनों रिपोर्ट की सच्चाई पता की जाएगी
मुख्य विकास अधिकारी जेपी रस्तोगी का कहना है कि वह दोनों टीमों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट की जांच कराएंगे। यह भी जानकारी की जाएगी कि कौन सी रिपोर्ट सहीं है। उसी के आधार पर गांवों में पेयजल व्यवस्था कराई जाएगी।
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