हिजबुल आतंकवादी बुरहान की मुठभेड़ में मौत के बाद कश्मीर में भड़की हिंसा शांत होने का नाम नहीं ले रही है। अमरनाथ यात्रियों के वाहनों पर पत्थर मारने के लिए वहां के आम लोगों को रुपये बांटे जा रहे हैं। किशोरों को पांच सौ और बड़ों को 17 सौ रुपये देने की बात सामने आई है। दिन में कर्फ्यू लगा दिया जाता है, इसके बाद भी हालात नियंत्रण में नहीं है।
बड़ौत क्षेत्र के गांव हसनपुर जिवानी गांव के प्रधान नीरज कुमार, ओमबीर सिंह, रमेश कुमार, नीटू, दीपक, प्रमोद, राजीव और सतीश कुमार अमरनाथ यात्रा से लौटे हैं। दो दिन तक यह जत्था बालटाल में फंसा रहा। बीएसए ऑफिस बागपत में कार्यरत सतीश कुमार बताते हैं वह नौ और 10 जुलाई को सेना की सुरक्षा के बीच बालटाल में रहे। सैकड़ों लोग यहां फंसे थे। लोगों को श्रीनगर के लिए मूवमेंट करने की छूट नहीं थी। यात्रियों पर पत्थर बरसाने वालों से श्रद्धालु बेहद नाराज थे।
बालटाल क्षेत्र के स्थानीय लोगों के माध्यम से ही वहां श्रद्धालुओं के बीच चर्चा फैली कि किशोरों को पत्थर बरसाने के बदले पांच सौ और बड़ों को 17 सौ रुपये रोजाना दिए जा रहे हैं। अमरनाथ यात्रियों के वाहनों को टार्गेट करने के लिए कहा गया है। सेना ने श्रद्धालुओं को वहां से रात में निकाला। बालटाल से श्रीनगर तक करीब पांच सौ किमी के रास्ते में जगह-जगह पेड़ कटे पड़े मिले। रास्ते रोक दिए थे। सेना ने खुद ही पेड़ों को हटाकर रास्ता खुलवाया और लोगों को सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचाया।
मुकाबले के लिए तैयार थे श्रद्धालु
श्रद्धालुओं पर पत्थर बरसाने वालों से मुकाबले के लिए अमरनाथ यात्री तैयार हो गए थे। सतीश कुमार बताते हैं बालटाल में फंसे लोगों का गुस्सा बढ़ रहा था। सेना बेहद संयम से काम ले रही है। हरियाणा, मध्य प्रदेश और यूपी के श्रद्धालुओं ने एलान कर दिया था कि अगर सेना उन्हें नहीं निकालती तो पत्थर के बदले पत्थर फेंकते हुए वह वापस अपनी यात्रा शुरू करेंगे। इस बीच सेना ने लोगों को समझाया और बालटाल से रात के समय फंसे श्रद्धालुओं को निकालना शुरू किया।