बागपत। जिला जेल अपराधियों का कॉल सेंटर बन गई है। एक माह में ही एक या दो नहीं बल्कि पूरी तीन हजार कॉल की गई। हिस्ट्रीशीटर अमर पाल ने एक केस में समझौते के लिए दबाव बनाया तो पुलिस ने जांच कराई, इसमें जुलाई माह में जेल से करीब तीन हजार कॉल करने की पुष्टि हुई। कॉल किसने और किसे-किसे की अब इसकी जांच शुरू हो गई। पुलिस ने चुपके से अमर पाल को बागपत से मेरठ जेल भी शिफ्ट कराया।
छपरौली क्षेत्र के शेरपुर लुहारा गांव का हिस्ट्रीशीटर अमर पाल उर्फ कालू जेल से ही गैंग का संचालन कर रहा है। इसका पता उस समय चला था, जब उसने सिंघावली अहीर गांव के हेड मास्टर सत्यपाल शर्मा की खिंदौड़ा गांव के आदर्श प्राथमिक विद्यालय में 23 अप्रैल को अपने गुर्गों से हत्या कराई थी। पुलिस ने बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
इतना ही नहीं अमर पाल की पत्नी भी उस केस में जेल गई थी, लेकिन इसके बाद भी पुलिस अफसर उस पर अंकुश नहीं लगा सके। उसने शेरपुर लुहारा गांव के दो सगे भाई विकास और पप्पू की हत्या के गवाह तरस पाल पर जेल से ही फोन करके केस में समझौते का दबाव बनाया। अफसरों से शिकायत करने पर 29 सितंबर को आरोपी अमरपाल के खिलाफ छपरौली थाना में धमकी देने का मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद पुलिस ने जांच की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। तरस पाल के मुताबिक पुलिस ने सर्विलांस के माध्यम से अमर पाल के इस्तेमाल किए जा रहे फोन की जांच की।इसमें पाया गया कि उसने अपने अलग-अलग मोबाइल नंबर से तीन हजार से अधिक कॉल की है।
जेल की व्यवस्था पर सवाल
बागपत। जेल तक मोबाइल कैसे पहुंचा, इस पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां की व्यवस्था में खामी उजागर हो गई है। अभी तक पुलिस ने अमरपाल के मामले की जांच की है, जेल में बंद अन्य आरोपियों के भी मोबाइल चलाने की शिकायतें मिलती रहती है। जेल प्रबंधन मोबाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाने में नाकाम नजर आ रहा है।
दो भाइयों की हत्या के केस में जेल गया था अमरपाल
लुहारा गांव के दो सगे भाई विकास और पप्पू का 15 जुलाई 2015 को अपहरण हुआ था। दो दिन बाद उनके शव बदरखा के यमुना खादर में गर्दन कटे पड़े मिले थे। 21 जुलाई को पुलिस ने अमरपाल को गिरफ्तार कर केस का खुलासा कर दिया था।
बागपत से मेरठ जेल भेजा जा चुका है अमर पाल
सीओ श्वेताभ पांडेय ने बताया हिस्ट्रीशीटर अमर पाल बागपत जेल में रहते हुए मोबाइल का इस्तेमाल करता था। इसी कारण उसको बागपत से मेरठ जेल ट्रांसफर किया गया था।