बागपत के काठा गांव में यमुना में डूबे लोगों के शवों को सड़क पर रखकर जाम लगाते ग्रामीण।
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अपनों की लाशों पर बिलख रहे लोगों पर सख्ती करने की पुलिस की चूक भारी पड़ गई। रोते बिलखते लोगों पर पुलिस की लाठियां पड़ीं तो लोग भड़क उठे, इसके बाद जो भी उनके सामने पड़ा, उसी पर ग्रामीणों ने अपना गुस्सा उतारा।
पुलिस-प्रशासन की अदूरदर्शिता के चलते काठा जल उठा। पुलिस-प्रशासन के वाहन तोड़ दिए गए। लोगों का कहना था कि जिनके घरों के चिराग बुझे हैं, उनके साथ ही पुलिस जबरदस्ती पर उतर आई।
काठा के ग्रामीण यमुना किनारे से लाशों को लेकर दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर पहुंचे। ग्रामीणों में गम और गुस्सा था। सवाल था कि हादसा क्यों और किसकी चूक से हुआ। जिन घरों के चिराग बुझ गए, उनका भविष्य क्या होगा। परिवारीजनों के आंसू रुक नहीं रहे थे, इसी बीच पुलिस-प्रशासन के अधिकारी पहुंचे।
लाशों को जबरन उठाने की तैयारी की। लाठियां फटकारनी शुरू कर दी। ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस-प्रशासन का रवैया इतना संवेदनहीन हो गया था कि जिनके परिवार के लोग मरे, उन पर ही लाठियां भांजनी शुरू कर दी। इसके बाद लोगों का गुस्सा भड़का।
डीएम भवानी सिंह खंगारौत, एसडीएम विवेक कुमार यादव, तहसीलदार राजबहादुर सिंह ने किसी तरह यहां से भागकर जान बचाई। सीओ बागपत दिलीप सिंह चोटिल हुए और इंस्पेक्टर बागपत दिनेश कुमार सिंह के सिर पर भी पत्थर लग जाने से वह घायल हो गए।
हाईवे पर महिला हेल्पलाइन की गाड़ी जल रही थी और पत्थर ही पत्थर फैले थे। इस स्थिति को संभालने में गांव के कुछ समझदार लोग सामने आए। कमिश्नर डॉ प्रभात कुमार और आईजी रामकुमार ने लोगों को समझाया। इसके बाद लाशों को उठाने दिया।