बड़ौत-कोताना मार्ग पर रोडवेज बस न होने से परेशान हैं आधा दर्जन गांवों की जनता
रोडवेज अधिकारियों की मिलीभगत से मनमाना किराया वसूल रहे टैंपो चालक
टैंपो में भूसे की तरह भरते हैं सवारी, दुर्घटना का भी खतरा
बड़ौत। अंधेर नगरी चौपट राजा..., यह मुहावरा बड़ौत- कोताना मार्ग पर रोडवेज की व्यवस्था पर चरितार्थ हो रहा है। रोडवेज के रिकार्ड में इस मार्ग पर प्रतिदिन एक बस दौड़ रही है, लेकिन क्षेत्र की जनता को लगभग पांच साल से रोडवेज बस में बैठने का अवसर तो दूर दर्शन तक नहीं मिल रहे हैं। अब क्षेत्र की जनता ने सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोलनी शुरू कर दी है। इस मार्ग के लगभग आधा दर्जन गांवों की जनता को टैंपो में बैठकर जोखिम भरी यात्रा करनी पड़ रही है। जनता की समस्या को लेकर न तो परिवहन विभाग के अधिकारी ही गंभीर हैं और न ही जनप्रतिनिधि इस तरफ ध्यान दे रहे हैं। जिसका खामियाजा जनता को ही भरना पड़ रहा है।
टैंपो में भूसे की तरफ भरी जाती हैं सवारी
- बड़ौत से कोताना मार्ग की दूरी लगभग दस किमी है। इस मार्ग पर रोडवेज बसों का संचालन न होने के कारण टैंपो संचालकों का राज चलता है। मनमाने ढंग से किराया वसूली और बदसलूकी होती है। पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध कारोबार फलफूल रहा है। प्रतिदिन सैंकड़ों लोग और कॉलेज के छात्र-छात्राएं बड़ौत तक सफर तय करते हैं। दुर्घटना भरे इस सफर को तय करने में जनता को जहां अधिक किराया देना पड़ रहा है वहीं जान भी जोखिम में है।
जनता बोली, चलनी चाहिए रोडवेज बस
- जनता की समस्या को लेकर बुधवार को अमर उजाला ने क्षेत्र की जनता से बात की। तो सभी का दर्द सामने आ गया। जनता ने जहां रोडवेज बसों के संचालन की मांग की है वहीं जनप्रतिनिधियों की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठाया है। साथ ही डग्गामार वाहनों से छुटकारा दिलाने की मांग की है। छह साल पहले विधायक केपी मलिक के हस्तक्षेप करने पर परिवहन विीाग की एक बस चली थी। जो कुछ समय बाद ही बंद हो गई।
ये बोले यात्री-----
- लुहारी निवासी सुधीर व जौनमाना निवासी जयकुमार का कहना था कि पिछले पांच साल से इस मार्ग पर बसों का संचालन बंद है। छह साल पहले एक बस चली थी, लेकिन कुछ समय बाद ही बंद हो गई।
- आशुतोष तोमर का कहना था कि सबसे ज्यादा परेशानी छात्राओं को उठानी पड़ती है, क्योंकि टेंपो चालक सवारियों को भूसे की तरह भरते हैं। टैंपो में छात्रा व महिलाओं के साथ अशोभनीय टिप्पणी भी होती है।
इन गांवों की जनता को नहीं बस की सुविधा
- दस किमी लंबे बड़ौत-कोताना मार्ग पर जौनमाना, ढ़िकाना, बोहला, राजपुर, ,खामपुर, लुहारी, कोताना, जागोस आदि गांव पड़ते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों लोग इस मार्ग से आवागमन करते हैं। परिवहन विभाग मार्ग पर बसों का संचालन करे तो प्रतिदिन काफी राजस्व की प्राप्ति हो सकती है।
डग्गामार वाहनों का चलता है राज, वसूलते है मनमाना किराया
- मार्ग पर 20 से 30 टैंपो चलते हैं। मार्ग पर डग्गामार वाहनों का राज है। टैंपो चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं। यदि कोई यात्री विरोध करता है तो उसे बीच रास्ते में ही उतार दिया जाता है।
ये बोले परिवहन विभाग के अधिकारी--
बड़ौत। बड़ौत डिपो के बस संचालन प्रभारी नरेन्द्र मान ने बताया कि इस मार्ग पर फिलहाल एक बस संचालित है। शीघ्र ही कुछ और बसों को चलाने का निर्णय लिया जाएगा। प्रयास किया जा रहा है।