बागपत में विशिष्ट बीटीसी 2004 में फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने वाले जिले के 17 शिक्षकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालय मेरठ ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिए हैं। फर्जीवाड़े में तत्कालीन बीएसए की संलिप्तता उजागर हुई है। जांच एजेंसी एंटी क्रप्शन ने बीएसए के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति शासन से मांगी है।
विशिष्ट बीटीसी 2004 में नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों की शिकायत सपा के एक नेता ने शासन से की थी। शिकायत के बाद जांच शुरू हुई। शासन ने मामले को गंभीर मान जांच एंटी क्रप्शन मेरठ से कराई। विवेचक इंस्पेक्टर अशोक राणा ने बताया जांच में 17 अभ्यर्थियों ने फर्जी बीएड डिग्री के आधार पर नौकरी पा ली थी। वर्ष 2008 में बागपत कोतवाली में इन 17 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। केस की विवेचना भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी कर रही है।
अदालत ने आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए हैं। उन्होंने गुरुवार को इस संबंध में कोतवाली पुलिस को बताया। कोतवाली प्रभारी मुकेश कुमार ने कहा आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास शुरू किए । उधर, तत्कालीन बीएसए पर लगे आरोपों के आधार पर जांच की। संलिप्तता मिलने पर शासन से बीएसए के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति मांगी।
इनके हुए गैर जमानती वारंट
विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालय मेरठ ने बबीता पत्नी बीरेश ललियाना, रामवीर पुत्र इकबाल मलकपुर, बीना पत्नी विजय आनंद बड़ौत, राहुल पुत्र मोहकम बड़ौत, पूनम चौधरी सादिकपुर सिनौली, सुधीर कुमार, राज कुमार हेवा, विपिन ढोडरा, आलोक राणा भडल, स्वीटी बिनौली, सतेंद्र कुमार मवीकलां, वीरेंद्र कुमार ढोडरा, सुषमा शर्मा बड़ौत, गीता बावली चुंगी बड़ौत, प्रीति तोमर लायन मलकपुर बड़ौत, प्रमोद कुमार हेवा और सोहनवीर सिंह डागर पांडवनगर बागपत शामिल हैं।
चार साल जांच के बाद हुआ था मुकदमा
इंस्पेक्टर अशोक राणा ने बताया वर्ष 2004 से 2008 तक मामले की जांच की गई। लखनऊ यूनिवर्सिटी से जारी की गई बीएड की डिग्री फर्जी पाई गई थी। अभ्यर्थियों के खिलाफ मुकदमा पहले ही दर्ज हो चुका है, अब बीएसए के खिलाफ चार्जशीट की अनुमति शासन से मांगी गई है।