फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Baghpat News: सरकारी हंटर से ईंट भट्ठा उद्योग को पड़ रही मार

Tue, 18 Mar 2025 12:14 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
विज्ञापन
बागपत के नौरोजपुर रोड ​स्थित भट्टा। संवाद
विज्ञापन
बागपत। कृषि के बाद सर्वाधिक एक लाख से ज्यादा श्रमिकों को काम देने वाला ईंट भट्ठा उद्योग अब ज्यादा फायदे वाला नहीं रहा। कभी बाल श्रम तो कभी ग्रैप की मार से ईंट भट्ठा उद्योग आहत है। लेकिन सरकारी कार्यों में लाल ईंटों के उपयोग पर रोक ने ईंट भट्ठा मालिकों की आर्थिक रूप से कमर तोड़कर रख दी हैं।
विज्ञापन

बागपत में 450 ईंट भट्ठे हैं और यह एक मार्च से शुरू हो चुके हैं। इनमें प्रत्येक पर औसतन 300 श्रमिक काम करते हैं। इस तरह जिले में एक से सवा लाख श्रमिकों की रोजी रोटी ईंट भट्ठों से चलती हैं। एक हजार से ज्यादा ट्रकों के पहिए भी ईंट भट्ठों की वजह से घूमते हैं। ईंट ढोने वाले प्रत्येक ट्रक पर एक चालक व एक हेल्पर के साथ ही चार श्रमिकों के हिसाब से कुल छह हजार लोगों का काम चल रहा है। मगर, वर्तमान में ईंट भट्ठा उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है।
दरअसल, जब से सरकारी कार्यों में लाल ईंटों के उपयोग करने पर रोक लगी, तब से भट्ठा मालिकों को आर्थिक झटका लग रहा है। भट्ठा मालिकों की मांग है कि लाल ईंटों पर लगी रोक हटनी चाहिए वरना, यह उद्योग बचाना मुश्किल होगा। काम करते समय श्रमिकों के साथ उनके बच्चे भी रहते हैं, लेकिन कई बार सरकरी तंत्र बाल श्रम के नाम पर भट्ठा मालिकों पर हंटर चलाने में गुरेज नहीं करता है।
विज्ञापन

ऐसा रैकेट भी है, जिनके इशारे पर कई लोग काम करने के एवज में भट्ठा मालिकों से एडवांस में मोटी नकदी प्राप्त कर फिर श्रमिकों को बंधुआ बनाकर काम कराने की शिकायत कर परेशान करते हैं। इससे भट्ठा मालिकों के कई बार लाखों रुपये डूब जाते हैं।
सर्दी के मौसम में बार-बार लगने वाले ग्रैप से दिल्ली व एनसीआर में ईंट ढोने वाले ट्रकों की नो एंट्री रहती है। इससे 15 प्रतिशत ईंटें पिछले सीजन की बिक्री होने से रह गईं। भट्ठा मालिकों की मानें तो गत सीजन की ईंटों के चट्टे लगे होने से इनका मूल्य गिरा है। तब ईंटाें की सप्लाई हो जाती तो अब प्रति हजार ईंट पांच हजार के बजाय छह हजार रुपये बिकती। ईंट भट्ठों को चलाने के लिए आसानी से बैंकों से कर्ज नहीं मिलना बड़ी समस्या है।
एक साल में होता है 1.35 अरब ईंट का उत्पादन
भट्ठे पर साल में औसतन कुल 30 लाख ईंटों का निर्माण होता है। यहां करीब 450 ईंट भट्ठे हैं। इस तरह साल में जिले में कुल 1.35 अरब ईंटों का उत्पादन होता है। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी तब होती हैं, जब बारिश से ईंटें खराब हो जाती हैं।

मालिकों को बाल श्रम के नाम पर परेशान किया जाता है, जिस पर रोक लगनी चाहिए। औद्योगिक विकास की योजनाओं का लाभ भट्ठा मालिकों को मिलना चाहिए। जिला उद्योग बंधु की बैठक में भट्ठा मालिकों को सदस्य बनना चाहिए। - नीरज नैन, महामंत्री, ईंट निर्माता समिति बागपत
बंधुआ श्रम की झूठी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। भट्ठा मालिकों को बैंकों से ऋण दिलाने की व्यवस्था की जाए। सरकारी कार्यों में लाल ईंटों पर लगी रोक हटनी चाहिए, ताकि यह उद्योग घाटे में जाने से बचे। - विनोद गोयल, कोषाध्यक्ष, ईंट निर्माता समिति बागपत

भट्ठा मालिकों की कोई समस्या होती हैं तो उसका जिला स्तर से निस्तारण किया जाता है। शासन स्तर की समस्याओं के लिए यहां से भट्ठा संचालकों की मांगों का पत्र भेज दिया जाता है। उद्योग व व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कार्य किया जा रहा है। - पंकज वर्मा, एडीएम
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें