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पुस्तक विक्रेताओं को उठाना पड़ा लाखों का नुकसान

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बड़ौत। कोरोना महामारी सेे पुस्तक विक्रेेताओं की परेशानी को भी बढ़ा दिया है। लॉकडाउन के चलते दुकानें बंद है। बड़ौत नगर मेें ही स्टेशनरी की लगभग 30 से 40 दुुकानें हैं। इनसे प्रतिमाह लाखों रुपये के किताबों की बिक्री होती है। अप्रैल, मई व जून में किताबों की बिक्री का सीजन होता था, जिससे हर दुकानदार लाखों की आमदनी करता है। मगर, लॉकडाउन के कारण किताबों की बिक्री न होने से दुकानदारों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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क्या बोले पुस्तक विक्रेता
वीके प्रकाशन के राजेश जैन भारती ने बताया कि अप्रैल माह में बिक्री के सीजन को देखते हुए बैंकों से पैसे लेकर किताबें हमने मंगा ली थी। बैंकों को ब्याज देना भारी पड़ रहा है। हमें लगभग प्रतिमाह एक से डेढ़ लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। अब कब दुकानें खुलेंगी, इसका कुछ पता नहीं।
आरना बुक एजेंसी के सचिन जैन व विशाल बुक एजेंसी के पुनीत जैन का कहना है कि उनके यहां से डिग्री कॉलेज में पुस्तकों की बिक्री करते हैं। विगत एक माह से घर में बैठे है। इससे बुरा दिन पहले कभी नहीं देखा था। अब तक दो से तीन लाख रुपये का नुकसान उठा चुके है।
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पिंटी किताब के संचालक वीरेंद्र कुमार जैन, नीरज पुस्तक सदन के संचालक पंकज जैन का कहना है कि स्कूल कॉलेज सभी बंद चल रहे हैं। बिक्री की आस में लाखों रुपये का माल मंगा लिया था, जो गोदाम में पड़ा है। काफी दिनों से दुकान बंद है। लगभग चार से पांच लाख रुपये का नुकसान हो चुका है।
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