कुर्डी टीले पर खाोदाई करते मजदूर। स्रोत ग्रामीण
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बड़ौत। भारतीय विरासत संस्थान द्वारा कुर्डी टीले पर किए जा रहे उत्खनन कार्य से यहां दफन रहस्यों से पर्दा उठने लगा है। जहां रविवार को खोदाई में कई ट्रेंचों से खंडित मृदभांडों और हड्डियों के निकलने का सिलसिला शुरू हो गया है। कुर्डी टीले पर संस्थान के महानिदेशक डॉ़ बुद्ध रश्मि मणि के निर्देशन में 14 शोधार्थियों द्वारा तीन अलग-अलग स्थानों पर 12 ट्रेंच बनाकर उत्खनन किया जा रहा हैं। कुछ ट्रेंच से बड़ी ईंटों की दीवारें सामने आई है। साथ ही मृदभांड भी काफी संख्या में मिल रहे हैं, जिन्हें पॉटरी यार्ड में सुरक्षित किया जा रहा है। रविवार को की गई खोदाई में कई ट्रेंच से खंडित मृदभांडों के साथ हड्डियों के निकलने का सिलसिला शुरू हो गया है।
यह सभी पुरावशेष मानव बस्ती की दावेदारी कर रहे हैं। वहीं जल्द ही संस्थान के महानिदेशक डॉ़ बुद्ध रश्मि मणि यहां आकर खोदाई का जायजा भी लेंगे। उधर, तिलवाड़ा के आला टीले पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा अधीक्षण पुराविद विनोद रावत द्वारा किए जा रहे उत्खनन में अभी भी दो ट्रेंच से मिली पुरा संपदा पर शोध चल रहा है। अन्य ट्रेंच से कोई खास सफलता नहीं मिली है। खोदाई में अब तक मिले पुरावशेषों से शवाधान केंद्र होने की संभावना जताई जा रही है।