बागपत में 15 लाख रुपये की फिरौती न मिलने पर आठ वर्षीय मोना की अपहरण के बाद हत्या करने के मामले में क्राइम ब्रांच ने तीनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इनमें दो आरोपी सगे भाई है। पुलिस अभी तक मोना के शव को बरामद नहीं कर पाई है।
पुलिस के मुताबिक शेखपुरा गांव के कृष्णपाल की बेटी मोना (8) चार अगस्त 2014 को रहस्यमय ढंग से लापता हो गई थी। तलाश करने पर उसका कहीं पता नहीं चला था। कृष्णपाल ने अपने भाई और भतीजों पर मोना का अपहरण करने का आरोप लगाते हुए बिनौली पुलिस से शिकायत की थी। घटना के चार दिन बाद यानी 8 अगस्त को कृष्णपाल के मोबाइल पर एसएमएस कर 15 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी।
कृष्णपाल ने अपने भाई और भतीजों को क्लीनचिट देते हुए गांव के ही दो सगे भाई रविंद्र और पवन पर मोना के अपहरण करने का शक जताया था। पुलिस ने आरोपी रविंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि उसका भाई पवन फरार चल रहा था। आरोपी पवन को साधु की हालत में 10 जनवरी 2016 को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस पूछताछ में उसने खुलासा किया था कि 15 लाख रुपये की फिरौती के लिए मोना का अपहरण किया था।
एसएमएस करने के बाद भी उन्हें रुपये नहीं मिले थे। उन्हें डर हो गया था कि मोना को जिंदा छोड़ दिया गया तो वह अपने परिजनों को घटना के बारे में बता देगी। इससे वे लोग फंस जाएंगे। फंसने के डर से उसने अपने भाई और साथी के साथ मिलकर उसकी हत्या कर शव को बरनावा के जंगल में दबा दिया था। पुलिस से बचने के लिए वह साधु बन गया था और राजस्थान, मध्यप्रदेश चल गया था।
पुलिस ने शव बरामद करने के लिए बरनावा के जंगल की खुदाई की थी, लेकिन शव बरामद नहीं हुआ था। केस के विवेचक क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर रामशरण सिंह का कहना है कि पवन, रविंद्र और कुलदीप अपहरण कर हत्या करने में शामिल रहे है। तीनों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया गया है।