जब कॉरिडोर के लिए मिट्टी डालने आएंगे, तब फंसेंगे अधिकारी
महापंचायत में कहा गया कि कॉरिडोर के लिए अधिग्रहण की गई जमीन के मुआवजे के अलावा खड़ी फसल का मुआवजा, पैमाइश त्रुटियां आदि समस्याओं का अभी तक कोई समाधान नहीं किया गया है। अगर इन खामियों को जल्द दूर नहीं किया जाता, है तो जब कॉरिडोर निर्माण के लिए अधिकारी मिट्टी डालने आएंगे तो तब उनको किसान की ताकत दिखाई जाएगी। अब अधिकारियों से मिलने नहीं जाएंगे, बल्कि अधिकारी ही धरने पर आएंगे और उनको किसानों की समस्याओं को दूर करना होगा।
गांवों में संगठन को मजबूत करेगी भाकियू
राकेश टिकैत ने कहा कि 22 जनवरी 2021 से अभी तक सरकार ने किसी भी संगठन से बात तक नहीं की। सरकार का काम केवल तानाशाही करना है और वह बाज नहीं आती है तो किसान किसी भी तरह से पीछे नहीं हटेंगे। कहा कि आरएसएस गांव-गांव में शाखाएं लगा रही है और बच्चों को इनसे दूर रखना है। बल्कि गांवों में भाकियू के संगठन को मजबूत करना है, जिससे आंदोलन को मजबूती मिल सके। वहां डिजिटल इंडिया से किसानों को जोड़ने की मांग उठाई गई, जिससे किसानों को गन्ना भुगतान समय से मिल सके। राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि सरकार दूध पर पॉलिसी ला रही है और अब गांव-गांव कोल्डड्रिंक की तरह बोतलों में विदेशी दूध बिकेगा।
देश ऋषि व कृषि पर आधारित, कोई छेड़छाड़ न करें
महापंचायत में पहुंचने से पहले भाकियू राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने दादरी गांव में शिवनारायण के आवास पर प्रेसवार्ता की। उन्होंने कहा कि यह देश ऋषि और कृषि पर आधारित है। इनके साथ कोई छेड़खानी ना करें। खेती किसानी अब फायदे का सौदा नहीं रही। यहां दो निजी चीनी मिल मलकपुर व किनौनी है। दोनों ने अभी तक आधा भी भुगतान नहीं किया। कहा कि संसद में ऐसा कानून बनना चाहिए कि सभी सांसद व मंत्री मंदिर-मस्जिद की जगह अपने विभाग पर ध्यान दें। मंदिर मस्जिद व गुरुद्वारों की जिम्मेदारी संत फकीरों की है। राजनीतिज्ञों की नहीं है। एनजीटी के कानून में बदलाव होना चाहिए। जिसमें किसान के ट्रैक्टर को दस साल के प्रावधान से अलग रखना चाहिए। इस दौरान गगन धामा, आदित्य सोलंकी, कमल दादरी, भगत सिंह, रामसेवक, रामनरेश, रामचंद्र, विरेंद्र प्रधान, सुंदर सिंह आदि उपस्थित रहे।