गांव नवाबपुरा स्थित प्राइमरी स्कूल परिसर में नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए गौरव टिकैत ने कहा कि किसानों को बर्बाद करने के लिए कृषि कानूनों को लाया गया है। संगठन इन कृषि कानूनों का वापस होने तक हर स्तर पर विरोध करता रहेगा। आठ माह से चल रहे आंदोलन को लेकर सरकार पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है।
आंदोलन काल में 650 किसान प्राणों की आहुति दे चुके हैं, लेकिन सरकार हठधर्मिता अपनाए हुए है। उन्होंने आंदोलन को किसानों के स्वाभिमान के लिए चलाये जाने तथा युवा वर्ग से अनावश्यक रूप से खर्चों पर रोक लगाने व खेतों पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार किसान सम्मान निधि तथा राशन बांटकर देश को पुन: गुलामी की ओर ले जाना चाहती है।
उन्होंने कहा कि 24 जुलाई को सुबह नौ बजे अफजलगढ़ स्थित गुरुद्वारे से ट्रैक्टर पर सवार किसानों का जत्था बिजनौर के लिए प्रस्थान करेगा। जहां से हजारों ट्रैक्टर बहसूमा के लिए रवाना होंगे। रात्रि विश्राम के बाद 25 जुलाई को सुबह दिल्ली बार्डर के लिए रवाना होंगे। इस दौरान उन्होंने गांव मुरलीवाला, लड्डूवाला, नबाबपुरा, तुरतपुर, मीरापुर, जामुनवाला, कादराबाद सहित विभिन्न गांवों में जनसंपर्क किया।