दश लक्षण के दूसरे दिन जैन अनुयायियों ने उत्तम मार्दव धर्म को अंगीकार कर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में जैन युवा मंच के तत्वाधान में चल रहें तेरहद्वीप विधान में विशेष पूजा-अर्चना की गई।
विधान में सर्वप्रथम चंद्र प्रभु भगवान का अभिषेक श्रद्धा के साथ किया गया। इसके बाद नित्य-नियम की पूजा और दश लक्षण धर्म की पूजा संगीत की मधुर धुनों के बीच की गई। श्रद्धालुओं ने पीत वस्त्र धारण कर नृत्य भी किये। विधानाचार्य नरेशचंद्र जैन शास्त्री द्वारा बीच-बीच में विधान की महत्ता बताई गई। विधान के बीच-बीच में श्रद्धालुओं ने नृत्य करके अपनी भावना प्रकट की।
इसके अलावा नगर के दिगंबर जैन छोटा जैन मंदिर व दिगंबर जैन अतिथि भवन में भी श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। दशलाक्षिणक पर श्रद्धालुओं द्वारा 10 दिन का निर्जला उपवास और विशेष धर्म साधना शुरू कर दी है। सायंकाल मंदिरों में भगवान की आरती उतारी गई। दिगंबर जैन बड़ मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए। छोटा जैन मंदिर में नेहरू बाल एकेडमी के बच्चों ने धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
उधर, अतिथि भवन में दशलक्षण के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म पर बोलते हुए विहर्ष सागर महाराज ने कहा कि मान को मारना ही मार्दव को स्वीकार करना होता है। अहंकार की दीवार स्वयं के भीतर जाने नहीं देती। अहंकार के कारण विवाद, संघर्ष आदि फैलता है। जहां अहंकार है वहां विलंब नहीं है। मात्र दुख ही वहां प्राप्त होता है।
दूसरी तरफ अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर मंडी में मुनि विहर्ष सागर महाराज के सानिध्य में 64 ऋद्धि विधान की पूजा भक्ति भाव से की गई। विधानाचार्य पंडित पारस शास्त्री के निर्देशन में विधान में नित्य नियम पूजन 64 ऋद्धि विधान की पूजा की। केसरिया वस्त्र पहने इंद्रों ने गर्म प्रासुक जल से जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया।
दिव्य मंत्रों की ध्वनि के मध्य शांति धारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र सुनील जैन को प्राप्त हुआ। विधान की पूजा में दशलक्षण पूजा, सौलहकरण पूजा, शांतिनाथ पूजा और 64 ऋद्धियों के अर्घ मांड़ले पर समर्पित किये गये। विधान के मध्य उत्तम मार्दव धर्म के संबंध में पारस शास्त्री ने विचार रखे। रात्रि में श्याद्धाद जैन संगीत मंडल के तत्वाधान में आरती हुई तथा आकाश ग्रुप द्वारा देशभक्ति के सुंदर नृत्य प्रस्तुत किए। इसमें हिमांशु, सोहनलाल, सचिन, विनोद जैन, राजेश, नरेंद्र जैन आदि रहे।
वहीं एसएस जैन समाज बड़ौत मंडी के तत्वावधान में सवंत्सरी महा पर्व आराधना समापन महोत्सव मनाया गया। समापन पर आचार्य सुभद्र मुनि ने कहा मानव जीवन इस आत्मा की अनमोल पूंजी है। आचार्य सुभद्र मुनि के सानिध्य में 84 वर्षीय वयोवृद्ध त्रिलोक चंद जैन और विनोद जैन और अष्ट दिवसीय तप, आठ वर्ष के वंश जैनऔर दस वर्ष के अरिहंत जैन ने भी संवत्सरी महापर्व की आराधना की।
लगभग 200 श्रद्धालुओं ने अष्ट दिवसीय तप किया। सभा में सुभाष जैन, अनिल जैन, प्रवीण जैन, मुख्य संयोजक अमित राय जैन, वीरेंद्र जैन, नीटू, मूलचंद जैन आदि मौजूद रहे।
बागपत में दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन विद्यानाचार्य सतीश शास्त्री ने विधान में बुधवार को उत्तम मार्दव धर्म की पूजा कराई। इसमें इंद्र और इंद्राणियों ने संगीतमय भक्ति आराधना की। दिन में तत्कार्थ सूत्र का वचन किया। आर्यिका कीर्तिमति माता ने कहा मिट्टी के समान मृदुलता का भाव होना उत्तम मार्दव धर्म है। शाम को सामूहिक श्रावक प्रतिक्रमण आरती भक्ति के कार्यक्रम हुए।
विद्यानाचार्य सतीश शास्त्री ने कहा दशलक्षण धर्म में दस धर्मों की व्याख्या की जाती है। दस धर्मों के अंदर पूरा जैन धर्म समाहित है। मीडिया प्रभारी राकेश मित्तल ने बताया रात्रि में नृत्य प्रतियोगिता हुई, इसमें जैन समाज के लोगों ने हिस्सा लिया। इसमें प्रहलाद जैन, आनंद जैन, सुधीर जैन, प्रमोद जैन, सचिन जैन, सुनील जैन मौजूद रहे।
खेकड़ा के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर, शांति नाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, बड़ागांव स्थित त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर, पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर आदि में दशलक्षण पर्व विधान में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर उत्तम मार्दव धर्म को अंगीकार किया। ब्रह्मचारिणी कल्पना दीदी ने नित्य नियम पूजन, देवशास्त्र गुरू पूजन कराया। मंदिर में रात्रि के समय शास्त्र वचन, सामूहिक आरती और प्रश्न मंच हुआ। इसमें अमित जैन, प्रवीण, संजय, विरेंद्र, तनु रहे।