आतिशबाजी निर्माण में कई वर्षों तक अपनी धाक जमाने वाला बड़ौत का आतिशबाजी कारोबार अब सिमटने लगा है। इसे ड्रैगन की नजर लग गई है। वर्तमान स्थिति यह है कि चाइनीज आतिशबाजी के कारण धंधा मंदा हुआ तो अधिकांश ने इस कारोबार से हाथ खींच लिए और अन्य व्यवसाय शुरू कर दिया। कुछ पुश्तैनी आतिशबाज ही बड़ौत को अलग पहचान दिलाने वाले इस कारोबार के अस्तित्व को बचाने में जुटे है।
एक समय था जब बड़ौत नगर की आतिशबाजी की ख्याति दूर-दूर तक थी। आतिशबाज ऐसे गोले, चक्र और अनार बनाने में माहिर थे कि आतिशबाजी के समय लोग अपलक निहारते रह जाते थे। डेढ़ दशक पहले तक यहां आतिशबाजी निर्माण की छोटी-बड़ी 35 फैक्ट्रियां और गोदाम होते थे।
प्रदेश के अलावा हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और अन्य हिस्सों में यहां से आतिशबाजी सप्लाई की जाती थी। मगर, अब यह कारोबार सिमटने लगा है। वर्तमान में सिर्फ तीन या चार फैक्ट्रियों ही बची है। नगर के आतिशबाजी कारोबारी मालिक मोहम्मद अंसार ने बताया कि नगर में आतिशबाजी का कारोबार कई दशकों पुराना है।
कई लोग तो छह से सात पीढ़ियों से इसी कारोबार में है। यहां चक्र, अनार, गोला और महताब बनाए जाते थे। अब चाइनीज आतिशबाजी ने इस कारोबार पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने अनार आदि आतिशबाजी बनानी बंद कर थी। हालत इतने बदतर हो चुके है कि कभी 4 करोड़ कारोबार यहां से होता था, अब हजारों में ही बात सिमट जाती है।
जबकि चाइनीज कारोबार करीब 3 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वर्ष 2014 की दीपावली पर यहां करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की चाइनीज आतिशबाजी का कारोबार हुआ था।
दिल्ली की रामलीला में यहां का धूम धड़का
बड़ौत। इस कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक एक जमाना था जब बड़ौत में बनी आतिशबाजी खरीदने के लिए शादी के सीजन में बुकिंग के लिए लोगों का तांता लगा रहता था। यहीं नहीं दिल्ली की रामलीला में रावण आदि के पुतले और आतिशबाजी यहां से बनाकर भेजे जाते थे। आतिशबाजी के प्रदर्शन के लिए बागपत के अलावा दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, गुजरात, सोनीपत, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर समेत कई शहरों और राज्यों में यहां के लोगों को आमंत्रित किया जाता था।
बच्चों का नहीं रुझान
बड़ौत। आतिशबाज मोहम्मद अनीस ने बताया कि उनका यह खानदानी कारोबार दफन हो जाएगा। उनके छह पुत्रों में से कोई भी इस कारोबार में दिलचस्पी नहीं लेता। अब उनके भी हाथ थक चुके है। जब तक काम चल रहा है, चलाएंगे। यही स्थिती रहीं तो नगर से यह कारोबार लुप्त हो जाएगा।
दूसरा व्यवसाय पकड़ा
बड़ौत। नगर निवासी महबूब, अय्यूब, यूसुफ और जावेद ने बताया कि इस काम में बचत न होने के कारण यह व्यवसाय काफी समय पहले छोड़ दिया था। अब सभी दिल्ली, हरियाणा और अन्य राज्यों मेें जाकर काम ढूंढ रहे है।