चौबली गांव का किसान 50 बीघे में कर रहा केले की खेती
पांच साल पहले शुरू की थी खेती, लोगों को भी कर रहे जागरूक
बड़ौत। गन्ना बेल्ट मेें केले की खेती कर चौबली गांव का किसान सतीश एक मिसाल कायम कर रहे है। वह पांच साल से केले की खेती कर कम लागत मेें अधिक मुनाफा कमा रहे है। यह मिसाल इसलिए भी है, क्योंकि जनपद में 74 हजार हेक्टेयर में गन्ने की फसल खड़ी है और सवा लाख किसान गन्ने की खेती से जुडे़ है। इसके बावजूद उन्होंने केले की खेती करने का निर्णय लिया। वह अन्य लोगों को भी केले की खेती के लिए जागरूक कर रहे है।
1400 से 2200 रुपये क्विंटल जाता है केला
किसान सतीश कुमार त्यागी पुत्र फकीरचंद 50 बीघे जमीन में केले की खेती कर रहे है। बताया कि केले की खेती में मां राजबाला पूरा सहयोग कर रहे है, पहले बेटा राहुल व अक्षय भी इसमें सहयोग करते थे, अब दोनों बाहर नौकरी कर रहे है। उन्होंने बताया कि उनका केला मदर डेयरी दिल्ली व आजाद मंडी दिल्ली में 20 से 25 रुपये प्रति किलो जाता है। यानी खाने का केला 2200 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल व सब्जी का केला 1400 रुपये प्रति क्विंटल जाता है। एक बीघे मेें 60 हजार से अधिक केले की खेती हो जाती है, कम लागत में अच्छा मुनाफा हो जाता है। पेमेंट भी अच्छा है।
परेशानियों से छुटकारे के लिए शुरू की केले की खेती
सतीश त्यागी बताते है कि असली वजह तमाम परेशानियों से छुटकारा पाने की सोच है। गन्ना का बकाया भुगतान, शुगर मिलों की मनमानी, लागत अधिक मुनाफा कम होने से वे कई सालों से परेशान थे। इसके चलते पांच साल पहले कुछ नया करने की ठान तो ली, पर यह तय नहीं कर पाए कि कौन सी फसल अपनाई जाए। इसी उधेड़बुन में दिल्ली रोड स्थित उद्यान विभाग के सचदल इकाई बड़ौत के प्रभारी देवराज से मिले तो उन्होंने केले की खेती के फायदे समझाएं। इसके बाद मुनाफा भी अच्छा खासा देख केले की फसल का निर्णय ले लिया।
लागत कम पैदावार अधिक
बड़ौत। केले की खेती में प्रति बीघा दवा, खाद आदि पर करीब 10 हजार रुपये की लागत आती है। एक बीघा में 40-50 क्विंटल केले का उत्पादन होता है। एक बार पौध लगाने के बाद वह तीन साल तक फल देता है। बाद में उन्हीं पौधों से कलम बनाकर फिर से नई पौध तैयार की जा सकती है।