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बलूचिस्तान को भारत से है मदद की आस

Sun, 11 Feb 2018 01:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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अमीनगर सराय के बसौद में लोगों को संबोधित करते बलूच नेता। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बलूचिस्तान मुक्ति फोरम से जुड़े मामा कादिर ने कहा कि पाकिस्तान में बलूच लोगों पर प्रतिदिन अत्याचार हो रहे हैं, लेकिन अत्याचारों से डरकर आजादी की लड़ाई थमने वाली नहीं है। बलूचिस्तान के लोग इंसाफ के लिए भारत की जनता से भी मदद चाहते हैं।
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पाकिस्तान की असलियत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों के सामने खुलकर आ चुकी है वह भारत से मदद चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग करते हैं कि उनकी मदद की जाए। बलूचिस्तान मुक्ति फोरम से जुड़े प्रमुख नेता और पाकिस्तान स्थित संग्राम स्थल से विस्थापित मामा कादरी अपने पौत्र के साथ बलूचिस्तान की आजादी के लिए भारतीय जनता से सहयोग मांगने और कार्य योजना तैयार करने के लिए भ्रमण कर रहे हैं।

 

शनिवार को वह  हिंद बलूच फोरम के संयोजक गोविंद शर्मा, संरक्षक स्वामी जितेंद्रानंद, शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन के साथ बिलोचपुरा पहुंचे। माना जाता है कि यहां के लोगों के पूर्वज बलूचिस्तान से आए थे। 
 

 

मामा कादिर ने कहा कि बलूचिस्तान की आजादी की जंग जारी रहेगी। पाकिस्तान के नापाक इरादे कभी पूरे नहीं होने दिए जाएंगे। बलूचिस्तान में पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे अत्याचार किसी से छिपे नहीं है। युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है और महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं।

 

पाक ने चीनी सैनिकों को उनके सिर पर बैठा दिया है और बलूचों को खत्म करने की खुली छूट दी हुई है। बलूचिस्तान से निकलने वाले कोयले, पथन और सोने को चीन ले जाता है। अन्य वक्ताओं ने बलूच नेता को हर संभव मदद का भरोसा दिया। गोविंद शर्मा ने कहा कि जिस तरह अत्याचार किए जा रहे हैं, वह गलत हैं। कार्यक्रम में इरफान खान, मास्टर सत्तार, आलम खां, मंजूर अहमद, चंगेज खां और इश्तकार आदि मौजूद रहे। संचालन अमित राय जैन ने किया।

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सांस्कृतिक विरासत का जुड़ाव बलूच से 
शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन के शोध में बताया गया था कि सैकड़ों वर्ष पहले बलूचिस्तान से आए कुछ लोग पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसे थे। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का जुड़ाव बलूच संस्कृति से है। इसी आधार पर पूरे विश्व में ब्लूचिस्तान मुक्ति के लिए आंदोलन चलाने वाली नायला खान, मजदक दिलशाद खान भी बड़ौत आए और बिलोचपुरा, गोशपुर आदि गांवों का दौरा भी किया था

बिलोचपुरा हमारे लिए मदीने जैसा
अमीनगर सराय। बिलोचपुरा गांव पहुंचे बलूच नेता मामा कादिर ने कहा कि बिलोचपुरा गांव उनके लिए मदीने जैसा है। भारत के लोग मददगार हैं और हमारी भावनाएं समझते हैं। बलूच नेताओं ने कहा कि उन्हें खत्म करने की साजिश रची जा रही है। इलाज कराने जाने वाले बलूचों को पाकिस्तान में जहर के इंजेक्शन लगा दिए जाते हैं। करीब 45 हजार युवक लापता हैं, अभी तक बलूचिस्तान के 10 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। एक-एक कब्र में 170 लोगों को दफना देते हैं। वह दुनिया भर में फैले अपने समाज के लोगों से मदद चाहते हैं। भारत सरकार को भी हमारी मदद करनी चाहिए।

अपनों के बीच नम हुई रेकी की आंखें
अमीनगर सराय। अपने दादा मामू कादिर के साथ बिलोचपुरा पहुंचे मासूम रेकी कादिर की आंखें गांव पहुंचते ही नम हो गई। उसने गांव के विषय में जाना, लोगों से बात की। यही नहीं बलूचिस्तान के प्रमुख व्यंजनों भी खाए। उसने भी लोगों से मदद की गुहार लगाई।

पाकिस्तान में है बुरे हालात 
बड़ौत। शनिवार को मामा कादिर खान ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि उनके बेटे जमील अहमद को तीन साल कैद में रखकर हत्या कर दी। पाकिस्तान की फौज बलूचिस्तान से लोगों को उठाकर आए दिन प्रताड़ित कर रही है और 300 से अधिक लोग उनकी कैद में हैं। वे भारत सरकार से इस संबंध में मदद लेंगे।

 

इस अवसर पर स्वामी जितेंद्रांनद ने बताया कि जब तक पाकिस्तान रहेगा, पूरे विश्व में शांति नहीं हो सकेगी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में 45 प्रतिशत आबादी ब्लूचिस्तान के लोगों की है। आजादी के बाद जो मुस्लिम पाकिस्तान गए थे, उन्हें भी आज वोट डालने तक अधिकार नहीं है। वे बलूच को अलग देश बनाने की मुहिम में जुटे हैं। 

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