हिसावदा के लिए खुशी का दिन था। समारोह देखने पहुंचे बच्चों ने गुब्बारे देखे तो उनका मन इन्हें पाने के लिए मचलने लगा। कार्यक्रम के बाद लोग रवाना हुए तो बच्चों ने मौका पाते ही गुब्बारों की रस्सी खींचनी शुरू कर दी।
जिन गुब्बारों को हासिल करने के लिए वह कई घंटे से इंतजार कर रहे थे। वे हासिल तो हुए मगर धमाके के साथ। गुब्बारों से निकली गैस से बच्चे झुलसे तो मौके पर चीख-पुकार मच गई।
गुब्बारे बच्चों के मन की मुराद जैसे होते हैं। लेकिन हिसावदा में इन्हीं गुब्बारों ने बच्चों के आंसू निकाल दिए। हादसे में झुलसे साहिल की मानें तो कार्यक्रम के बाद बच्चों ने रस्सी खींचनी शुरू कर दी। जैसे ही गुब्बारे मिले तो सब उन पर झपट पड़े। इस बीच गुब्बार फट गए। गुब्बारे पाने के लिए जो बच्चे छीनाझपटी कर रहे थे, वे रोने लगे। कुछ बच्चों के चेहरे, हाथ और पैर झुलस गए थे।
अभिभावक किशोर ने बताया कि वह अपने घर पर बैठे काम कर रहे थे। गुब्बारे फटने की जानकारी मिली तो वह दौड़े। उसके दो बेटे पूरी तरह झुलसे हैं। लगता है कि जैसे गैस के गुब्बारों में ्िकसी बीड़ी के पतंगे से आग लगी हो।
अभिभावक बच्चों को लेकर पहले पिलाना और फिर बागपत पहुंचे। रोहित की हालत गंभीर थी, लेकिन अन्य तीन बच्चों के अभिभावकों ने भी जिद कर बच्चों को रेफर करा लिया। उधर, जिला अस्पताल में सागर ने बताया कि करीब 20 बच्चे गुब्बारे हासिल करने पर लगे थे। इस बीच कुछ उनसे बड़ी उम्र के बच्चे भी पहुंच गए और गुब्बारे फोड़ दिए।
लड़ी वाले पटाखे भी छुड़ाए गए
राज्यपाल मलिक के परिवार के वीरेंद्र मलिक ने बताया कि कुछ लोगों ने पटाखे भी छुड़ाए थे। ग्रामीण खुशी में थे किसी तरह उन्हें मनाया गया। मंच के सामने भी छुड़ाए। बच्चों को मौका मिला तो वह गुब्बारे उतारने लगे।
अस्पताल की ओर दौड़े
आयोजक भी अस्पताल की तरफ दौड़े। पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया गया। खुद राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपने परिवार के लोगों को मदद के लिए भेजा।