बागपत के सैड़भर गांव में रविवार रात घर में सो रही रिया के हाथ और पैर में सांप ने डस लिया। रिया की सोमवार सुबह हालत बिगड़ने लगी तो उसने परिवार वालों को बताया। परिवार वाले झाड़फूंक से सांप के डसने का उपचार कराने में लग गए। उसके बाद भी हालत बिगड़ गई तो पहले सीएचसी लेकर पहुंचे और वहां से उसे जिला अस्पताल रेफर किया, जहां पहुंचने से पहले उसकी मौत हो गई।
सैड़भर गांव निवासी मजदूर जुगनू ने बताया कि रविवार रात उसका परिवार घर में सोया हुआ था। उसकी बेटी रिया अलग कमरे में चारपाई पर सोई हुई थी। बताया कि रात करीब एक बजे सांप घर में घुस गया और चारपाई पर सो रही रिया के हाथ और पैर में डस लिया। रात में रिया को सांप के डसने के बारे में पता नहीं चला। सोमवार सुबह करीब पांच बजे उसकी हालत बिगड़ने लगी। रिया ने परिवार वालों को इस बारे में बताया।
उसके हाथ और पैर पर निशान देखकर सांप के डसने के बारे में पता चला। उन्होंने पहले गांव के निजी चिकित्सक से उपचार कराया। इसके बाद झाड़फूंक करने वाले के यहां ले गए। कई घंटे झाड़फूंक के बाद रिया को घर ले आए। सोमवार दोपहर रिया की हालत बिगड़ने लगी, तो उसे लेकर पिलाना सीएचसी पहुंचे।
वहां पर चिकित्सकों ने एंटी स्नेक वेनम की 10 वैक्सीन लगाकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही रिया की मौत हो गई। रिया अपने परिवार में चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। इस मामले में डॉ. शाहिद अली का कहना है कि युवती को मृत अवस्था में जिला अस्पताल लाया गया। उसको सांप ने डसा हुआ था, जिसके निशान भी हाथ-पैर पर थे।
झाड़फूंक के चक्कर में गंवा रहे गोल्डन आवर
जिले में सांप के डसने के 100 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। बिनौली के भाई-बहन को कई बार सांप डस चुके हैं। सांप के डसने से बिनौली के युवक की मौत भी हो चुकी है। जिले में सांप के डसने के बाद लोग झाड़फूंक कराने में लग जाते हैं, जिससे गोल्डन आवर (पहला घंटा) बर्बाद हो जाता है और सांप का जहर पूरे शरीर में फैल जाता है। सोमवार को युवती की मौत भी झाड़फूंक के चक्कर में हुई। सीधे जिला अस्पताल पहुंचकर उपचार कराने पर जान बचाई जा सकती है।
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