इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन बताते हैं कि भगत सिंह के नाती सुखविंदर जीत सिंह को वर्ष 2011 में पता लगा था कि सिसाना गांव में वह बंदूक मौजूद है, जिसको सरदार भगत सिंह ने इस्तेमाल किया था। तब वह सिसाना पहुंचे थे और बंदूक को हाथ में लेकर देखा था।
विरासत में हमारे नाम हो या संग्रहालय में रखवाई जाए बंदूक
बंदूक से हमारी काफी यादें जुड़ी हैं। मेरे पिता बताते थे कि देश की आजादी की लड़ाई में भगत सिंह ने भी बंदूक का इस्तेमाल किया था। विरासत का लाइसेंस बनवाने के लिए दो बार फाइल चलाई, लेकिन वह गुम हो गई। अब विरासत में बंदूक हमें मिल जाए या उसे संग्रहालय में रखा जाए।
- सतेंद्र जैन, पुत्र जगदीश प्रसाद
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उस बंदूक को परिवार का कोई सदस्य लेना चाहता है तो उसको विरासत के तहत लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदन करना होगा। लाइसेंस जारी होने पर बंदूक उनको मिल जाएगी।
- राजकमल यादव, जिलाधिकारी