फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: थाने के मालखाने में बंद है भगत सिंह की इस्तेमाल की हुई बंदूक, दिल को छू जाएगी सरदार सिंह की ये दमदार कहानी

Fri, 24 Mar 2023 02:11 AM IST
कपिल kapil अंकित चौहान, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत

सार

Baghpat News : सरदार भगत सिंह की इस्तेमाल की हुई बंदूक थाने के मालखाने में बंद है।आपके भी दिल को छू जाएगी सरदार सिंह की ये दमदार कहानी।
विज्ञापन
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सरदार भगत सिंह की इस्तेमाल की हुई लगभग 100 साल पुरानी बंदूक 12 साल से बागपत थाने के मालखाने में बंद है। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान वर्ष 1929 में भगत सिंह जब अपने साथियों के साथ केंद्रीय संसद में बम फेंकने के लिए दिल्ली रवाना हुए तो बंदूक भी साथ लेकर गए थे। संसद में घुसने से पहले उन्होंने बंदूक अपने साथी विमल चंद्र जैन को लौटा दी थी।

विज्ञापन


बागपत में सिसाना गांव के रहने वाले स्वतंत्रता सेनानी लाला विमल प्रसाद जैन के पिता सुल्तान सिंह 18 गांवों के जमींदार थे। उन्होंने अमेरिका निर्मित दोनाली बंदूक मंगवाई थी। विमल प्रसाद जैन की सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त से दोस्ती थी और केंद्रीय संसद में बम फेंकने की योजना बनाने के लिए सभी गांव सिसाना में कई दिन तक रहे थे।

जमींदार सुल्तान सिंह का निधन हो गया तो बंदूक सुल्तान सिंह के बेटे व विमल प्रसाद के भाई जगदीश प्रसाद के नाम हो गई थी। वर्ष 2011 में जगदीश प्रसाद का निधन हो गया। तब से बंदूक बागपत थाने के मालखाने में बंद है।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: कुट्टू के आटे से सावधान: यहां व्रत का भोजन खाकर बिगड़ी 100 से ज्यादा लोगों की हालत, हर तरफ मचा हड़कंप,तस्वीरें

Trending Videos
विज्ञापन

इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन बताते हैं कि भगत सिंह के नाती सुखविंदर जीत सिंह को वर्ष 2011 में पता लगा था कि सिसाना गांव में वह बंदूक मौजूद है, जिसको सरदार भगत सिंह ने इस्तेमाल किया था। तब वह सिसाना पहुंचे थे और बंदूक को हाथ में लेकर देखा था।

विरासत में हमारे नाम हो या संग्रहालय में रखवाई जाए बंदूक
बंदूक से हमारी काफी यादें जुड़ी हैं। मेरे पिता बताते थे कि देश की आजादी की लड़ाई में भगत सिंह ने भी बंदूक का इस्तेमाल किया था। विरासत का लाइसेंस बनवाने के लिए दो बार फाइल चलाई, लेकिन वह गुम हो गई। अब विरासत में बंदूक हमें मिल जाए या उसे संग्रहालय में रखा जाए। - सतेंद्र जैन, पुत्र जगदीश प्रसाद

यह भी पढ़ें: PHOTOS: धमकी से दहशत में परिवार, बच्चों को नहीं भेजते स्कूल, घर का सामान भरकर पलायन की तैयारी


उस बंदूक को परिवार का कोई सदस्य लेना चाहता है तो उसको विरासत के तहत लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदन करना होगा। लाइसेंस जारी होने पर बंदूक उनको मिल जाएगी। - राजकमल यादव, जिलाधिकारी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें